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निगम ने बुलाई 28 गोशालाओं की समिति, सिर्फ नौ पहुंचीं, दो ने किया मदद का वादा

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पानीपत। बेसहारा गोवंशों के लिए सरकार करोड़ों का बजट, निगम फंड एवं लोग दान कर रहे हैं, फिर भी भूखे गोवंश सड़कों पर भटकते हैं। इसके हल के लिए सोमवार को नगर निगम ने जिले में पंजीकृत 28 गोशाला समितियों के संचालकों को बुलाया। यहां महज नौ समिति संचालक पहुंचे और दो ने ही सहयोग का वादा किया।
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नैन गोशाला समिति ने 1000 और बरसत रोड स्थित श्रीराधा कृष्ण नंदीशाला ने 250 से 300 गोवंश लेने की हामी भरी है। ये गोशालाएं करीब 200 बेसहारा पशुओं को पहले ही ले चुकी है। गोशाला और नंदीशाला के प्रधान राजीव जैन ने पशुओं को निशुल्क लेने का वादा किया है। शहर की सभी गोशालाएं अगर 20 से 50 बेसहारा गोवंशों को ले लें तो सड़कों से काफी हद तक गाय एवं सांड़ हट जाएंगे और हादसों में लगाम लगेगी, लेकिन इन गोशाला संचालकों ने सुविधाओं के अभाव में हाथ पीछे खींच लिए हैं। समिति संचालकों का कहना है कि उनके पास पहले ही अधिक गोवंश हैं। चारा तीन गुना महंगा हो गया है। ऐसे में उनके लिए संभव नहीं।
नगर निगम अधिकारियों ने बरसत रोड स्थित गोचरण की करीब 10 एकड़ जमीन पर अपनी गोशाला बनाने पर बैठक में विचार किया। इसे निगम सदन की बैठक में पास कराया जाएगा। यह निर्णय भी हुआ कि निगम अपनी गोशाला का केयर टेकर राजीव जैन को बनाएगा। यह भी फैसला हुआ कि निगम बेसहारा पशुओं को उठाने के लिए मैनपावर का टेंडर लगाएगा। तब तक शहरी विधायक निधि से इन्हें उठाया जाएगा।
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जिले में गोसेवा आयोग से पंजीकृत 28 और अपंजीकृत चार मिलाकर कुल 32 गोशालाएं हैं। सभी गोशालाओं को विभिन्न श्रेणियों में बजट जारी होता है। इस वर्ष पंजीकृत गोशालाओं को 1.40 करोड़ रुपये भेजे गए। नगर निगम नैन गोअभ्यारण को चार लाख रुपये प्रतिमाह अलग देता है।
कई गोशालाएं पशुओं को ले सकती हैं। चंदे और सरकार से मिलने वाली मदद से सक्षम हैं, लेकिन वे निगम से भी बजट चाहती हैं। कुछ गोशाला संचालक आगे आए हैं, जिनको 1200 से 1300 बेसहारा गोवंश दिए जाएंगे।
- संजीव दहिया, प्रधान, सफाई एंड मैनेजमेंट कमेटी, नगर निगम
सुविधाओं का आश्वासन मिले तो गोशालाएं हैं तैयार - डॉ. लोहान
सभी गोशालाओं में हजारों की संख्या में पशु हैं लेकिन सुविधाओं का अभाव है। चारे भी महंगा हो गया है। इसलिए गोशालाएं गोवंश लेने से मना कर रहीं। चारा और सुविधाओं का आश्वासन मिले तो सभी गोवंश रखने को तैयार होंगे।
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- डॉ. अशोक लोहान, वेटनरी सर्जन, पशुपालन विभाग
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