जिले में कोरोना महामारी का असर कम होने व लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी रेलवे रोड व्यापार मंडल के दुकानदार अभी तक मंदी से उभर नहीं पाए हैं। रेलवे रोड पर 300 से ज्यादा दुकानें हैं। कुछ दुकानदार तो ऐसे भी हैं जो पिछले कुछ महीने से अपनी दुकान का किराया नहीं दे पा रहे थे, जिसकी वजह से उनको दुकान खाली करके अपने घर पर बैठना पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि सरकार को दूसरी लहर के बाद व्यापारियों की मदद करनी चाहिए।
रेलवे रोड व्यापार मंडल के दुकानदारों ने बताया कि उनके बाजार में पहले जूते, बिजली उपकरण, स्पीकर्स व टिकट बनाने का अच्छा काम चलता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद सभी व्यापारियों को मंदी का सामना करना पड़ रहा हैै। व्यापारी लगभग 40 प्रतिशत तक अब अपना व्यापार कर रहे हैं, लेकिन अब इनमें कहीं न कहीं यह डर है कि तीसरी लहर न आ जाए।
पानीपत उद्योगिक नगरी होने के कारण यहां से पहले रोजाना हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर यूपी, बिहार व झारखंड जाते थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण सरकार ने 22 मार्च 2020 से ही सभी टिकटों का काम बंद कर दिया है। जिससे रेलवे रोड पर टिकट बनाने वाले 8 दुुकानदार बिल्कुल बेरोजगार बैठे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने रेलवे स्टेशन पर सभी टिकट बनाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन हमें अभी तक जेटीबीएस पैसेंजर टिकट बनाने की अनुमति नहीं दी है।
दुकानदारों का कहना
काम 50 प्रतिशत तक मंदा : अनिल
बेचने का हॉल सेल का काम इस समय 50 प्रतिशत तक मंदा है। शादी के समय पर व्यापार में तेजी आती है। वहीं गेस्ट हाउस का काम तो बिल्कुल बंद पड़ा है। कई दुकानदारों को अपनी दुकानें भी बंद करनी पड़ी है।
-अनिल मदान, पूर्व प्रधान, रेलवे रोड व्यापार मंडल
जूते-चप्पल के दाम बढ़ गए : रोहित
पहले ही हम दुकानदारों की महामारी की वजह से मंदी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही अब जूते, चप्पल के दाम पहले से काफी ज्यादा बढ़ गए हैं। जिसकी वजह से केवल 50 प्रतिशत ही व्यापार बचा हुआ है।
-रोहित गर्ग, थोक जूता व्यापारी
दिनभर ग्राहक का इंतजार : विनोद
दिन भर में कोई भी ग्राहक सामान लेने के लिए नहीं आता है। हम इंतजार करते रहते हैं कि कब कोई ग्राहक सामान आकर ले जाए। पूरा 100 प्रतिशत व्यापार ठप पड़ा है। अब तीसरी लहर की चिंता सता रही है।
-विनोद कुमार, थोक स्पीकर विक्रेता
किराया पूरा देना पड़ रहा है : सुलेख
हमारा खर्चा पहले की तरह पूरा ही है, लेकिन अब आमदनी आधी भी नहीं बची है। हमें दुकान का किराया पूरा देना पड़ रहा है। कर्मचारियों को भी पूरे पैसे देने पड़ रहै हैं। माल ले जाने वाले दुुकानदारों ने उधारी भी नहीं दी है।
-सुलेेख जैन, थोक जूता व्यापरी
टिकट बनाने वालों का कहना
डेढ़ साल से खाली बैठे हैं : राधा
22 मार्च से ही हम टिकट एजेंटों को जेटीबीएस टिकट बनाने की अनुमति नहीं दी गई है। जबकि सरकार ने रेलवे स्टेशन पर बने टिकट काउंटर को इजाजत दे दी है। पिछले डेढ़ साल से हम बिल्कुल खाली बैठे हैं।
-राधा रानी, टिकट एजेेेंट
उधार पैसे लेकर काम चला रहा : पवन
लोगों को उधार लेकर अभी तक डेढ़ साल से दुकान मालिक का किराया दे रहे हैं। हम टिकट बनाने वालों को अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। मंदी के कारण उधार लिए पैसे का ब्याज भी नहीं दे पा रहा हूं।
-पवन कुमार, टिकट एजेंट
अनुमति नहीं मिली तो जल्द प्रदर्शन करेंगे : पारस
पैसेंजर ट्रेन चलने के बाद भी हमें जेटीबीएस पैसेंजर व जनरल टिकट काटने की इजाजत नहीं दी गई है। टिकट न काट पाने के कारण उधारी बढ़ती जा रही है। यदि रेलवे विभाग ने इजाजत नहीं दी तो जल्द प्रदर्शन करेंगे।
-पारस चावला, टिकट एजेंट