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बंकरों में छिपने की विवशता

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इसराना। तन्वी - फोटो : Panipat
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पानीपत/इसराना। ‘पापा तीन दिन से यूनिवर्सिटी में बने बंकरों में ही छुपे हैं। कुछ दिन का खाना शेष बचा है। बाहर गोलाबारी हो रही है। हालात बेहद चिंताजनक है। बार-बार भारतीय दूतावास से गुहार लगा रहे हैं। दूतावास उन्हें रोमानिया के बॉर्डर तक बसों में पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। वे वहां से पैदल बॉर्डर क्रॉस करेंगे।’ यह हाल यूक्रेन में फंसे छात्रों ने बयां किया।
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उनकी स्थिति से परिजन चिंतित हैं। इसराना में कार्यक्रम में पहुंचे सांसद संजय भाटिया से गांव बांध व इसराना के कुछ ग्रामीण मिले। उन्होंने सांसद से यूक्रेन में फंसे छात्रों को वहां से निकालने की मांग की। सांसद संजय भाटिया ने आश्वासन दिया है कि दूतावास छात्रों को वहां से सकुशल निकाल लेंगे।
यूक्रेन में फंसे इसराना के विनीत ने वीडियो कॉल कर बताया कि वह विनन्यतस्य शहर में नेशनल पिरोगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। विनीत ने बताया कि यहां पर हालात बहुत खराब हो चुके हैं। तीन दिनों से यूनिवर्सिटी में बनाए गए बंकर में है। विनीत के पिता महेंद्र जागलान ने बताया कि किसी तरह बेटा लौट आए, बस यही चिंता खाए जा रही है।
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दूतावास से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला
बांध की तनवी यूक्रेन के देनीप्रो शहर में देनीप्रो स्टेट यूनिवर्सिटी में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है। तनवी ने बताया कि उन्हें 25 फरवरी को यहां से निकलना था लेकिन हॉस्टल के नजदीक एयरपोर्ट पर 24 फरवरी को हमला हो गया। ऐसे में उन्हें हॉस्टल में ही रुकना पड़ा। शुक्रवार को दूतावास पर कॉल किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। तनवी के पिता नरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी बेटी किसी तरह देश लौट आए। पहले रोजाना एक बार फोन करते थे अब दिन में छह-सात बार फोन कर हालात पूछ रहे है। उन्होंने सरकार से बच्चों को वतन लौटाने में मदद की गुहार लगाई है।
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