पानीपत। जिले में फसल पककर तैयार है लेकिन कटाई में तेजी नहीं आ पा रही। वजह, कंबाइन मशीनें मध्य प्रदेश में फसल कटाई में लगी हैं और 10 अप्रैल के बाद ही इनके यहां पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद भी जिले में गेहूं की कटाई का काम तेजी पकड़ सकेगा।
उधर, अनाज मंडी में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हो चुकी है। इसके बावजूद किसान फसल लेकर मंडियों में नहीं आ रहे हैं, क्योंकि फसल ही नहीं कटी है। संभावना जताई जा रही कि हफ्ते भर बाद मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ेगी।
श्रमिकों से फसल कटवाने में करीब चार गुना है खर्च
श्रमिकों से फसल कटवाना कंबाइन के मुकाबले करीब चार गुना महंगा पड़ता है। एक एकड़ खेत में 10 श्रमिक लगाने होते हैं तो फसल काटने में दो दिन का वक्त लेते हैं। एक श्रमिक की मजदूरी 400 रुपये होती है यानि दो दिन के लिए 8000 रुपये खर्च करने होंगे। उधर, कंबाइन एक एकड़ खेत को महज दो घंटे में काट देती है। इसके एवज में दो से ढाई हजार रुपये ही खर्च होते हैं। गांव करहंस के किसानों ने बताया कि वह मजबूरी में खुद ही फसल काट रहे हैं। कंबाइन आई नहीं और श्रमिक भी नहीं मिल रहे हैं।
बोले किसान :
कंबाइन न आने से अभी तक फसल खेत में खड़ी है। जितनी भी कंबाइन हैं, इस वक्त मध्य प्रदेश में लगी हैं। वहां फसल कटाई के बाद पंजाब और हरियाणा का नंबर आएगा। - दलबीर सिंह, किसान
- पिछले साल भी गेहूं खरीद के दौरान समय पर कटाई नहीं हो पाई थी। बाद में सभी किसान एकसाथ अपनी फसल लेकर अनाज मंडी पहुंचने लग गए थे। - राधेश्याम सेहरावत, किसान
- 20 दिन में फसल नहीं कटेगी तो बारिश की आशंका भी है। इससे फसल खराब हो सकती है। अगर जल्द कंबाइन नहीं आई तो खुद फसल काटनी पड़ेगी। - वजीर कुमार, किसान