पानीपत। अबकी महागौरी के पूजन के दिन शनिवार को दुर्गा अष्टमी पर सुकर्मा योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सुकर्मा योग को शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता जरूर मिलती है। खासकर नौकरी ज्वाइन करना अथवा मांगलिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
यह भी मान्यता है कि महागौरी की पूजा से बच्चे दीर्घायु होते हैं। अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी या महाष्टमी व्रत रखा जाता है। इस साल चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 08 अप्रैल को रात 11 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगी और 10 अप्रैल दिन रविवार को सुबह 01 बजकर 23 मिनट तक है। उदयातिथि के अनुसार, दुर्गाष्टमी व्रत 09 अप्रैल को रखा जाएगा। वहीं 9 अप्रैल, सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर सुकर्मा योग लग जाएगा जबकि पुनर्वसु नक्षत्र पूरे दिन है। इस दिन का योग और नक्षत्र मांगलिक कार्यों के लिए शुभ है।
चैत्र शुक्ल अष्टमी की तिथि में रवि योग भी बना हुआ है। इस तिथि में रवि योग 10 अप्रैल को सुबह 03 बजकर 31 मिनट से शुरू हो रहा है, जो सुबह 06 बजकर 01 मिनट तक है। इस दिन का शुभ समय 11:58 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक है। उन्होंने कहा कि जिनके यहां दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन होता है, उनको इस दिन विधिपूर्वक कन्या पूजन के साथ हवन भी करें।
इन शुभ मुहूर्त में करें महागौरी की पूजा-
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:32 से 05:17 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 से 03:20 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- सायं 06:31 से सायं 06:55 बजे तक।
अमृत काल- 10 अप्रैल, रविवार सुबह 01:50 बजे से 03:37 बजे तक।
रवि योग- 10 अप्रैल, रविवार सुबह 04:31 बजे से 06:01 बजे तक।
निशिता मुहूर्त- दोपहर 12:00 बजे से रात 12:45 बजे तक।
कन्या की पूजा करने से होता है शत्रु का नाश
शास्त्रों में मान्यता है कि सभी शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। कन्या की पूजा करने से यश, कीर्ति, वैभव, धन और ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही भय और शत्रुओं का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि जप, तपस्या और दान से देवी उतनी प्रसन्न नहीं होती जितनी कि एक लड़की की पूजा की जाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि एक कन्या की पूजा से यश और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। दो की पूजा से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है, तीन की पूजा से धर्म, अर्थ और काम, चार की पूजा से राजपद, पांच की पूजा से शिक्षा और सिद्ध होता है। शिक्षा, छह की पूजा करने से सिद्धि प्राप्त होती है, सात की पूजा से साम्राज्य की प्राप्ति होती है, आठ की पूजा से धन की प्राप्ति होती है और नौ की पूजा से पूरी पृथ्वी पर प्रभुत्व होता है।