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सीपीसीबी ने एचएसपीसीबी को पानीपत की तीन और बड़ी फैक्टरियों को बंद करने के दिए निर्देश

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पानीपत। टैक्सटाइल इंडस्ट्री । - फोटो : panipat
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने मानकों के विरुद्ध चल रही शहर की तीन और फैक्टरियों को बंद करने के निर्देश दिए हैं। सीपीसीबी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को ये आदेश जारी करते हुए राज्य के बिजली निगम के एमडी को भी पत्र लिखकर इन तीनों फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन काटने को कहा है। इन दो सालों में सीपीसीबी ने पानीपत के 120 उद्योगों को क्लोजर नोटिस व 170 को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये उद्योग मानकों के खिलाफ चलते पाए गए थे। जिन 120 उद्योगों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका ईटीपी बंद मिला और वो फैक्टरी भूजल में प्रदूषित जल छोड़ती पाई थी। सीपीसीबी की इस कार्रवाई पर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बताया जा रहा है कि बोर्ड अब तक 110 के करीब यूनिटों को बंद कर चुका है। सीपीसीबी अब तक 170 को कारण बताओ नोटिस दे चुका है, लेकिन बाद में उद्योगपति हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलीभगत कर फैक्टरी दोबारा चला लेते हैं।
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28 मार्च को सीपीसीबी की टीम ने इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित एएए स्पीनर्स, सेक्टर 29 पार्ट टू स्थित स्टाईल एन कलर व निखिल ब्लेंकेट कंपनी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान तीनों फैक्टरियां में ईटीपी सही प्रकार से काम नहीं करते पाया गया। तीनों के पास भूजल प्राधिकरण से अनुमति नहीं थी और तीनों की ही लॉग बुक मेनटेन नहीं थी। इसी पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीनों को बंद करने के निर्देश दिए हैं।
सीपीसीबी देता रहा बिजली निगम को बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश : सीपीसीबी दो साल से जिन फैक्टरियों को क्लोजर नोटिस जारी कर रहा है। साथ ही बिजली निगम को भी इन फैक्टरियों के बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दे रहा है। लेकिन बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने आज तक किसी फैक्टरी का बिजली कनेक्शन नहीं काटा है, क्योंकि उन्हें कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
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56 यूनिटों का किया था निरीक्षण : सीपीसीबी ने मार्च और अप्रैल महीने में पानीपत की करीब 56 यूनिटों का निरीक्षण किया था। इनके ईटीपी के सैंपल लेने के साथ पर्यावरण और जल प्रदूषण को देखते हुए सैंपल लिए थे। सैंपल में एक के बाद एक सभी यूनिटें फेल होती चली गई।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री फैला रही प्रदूषण : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने नोटिसों में पानीपत के उद्योगों पर टिप्पणी भी की है। बोर्ड के चेयरमैन एसपी सिंह परिहार ने जारी नोटिसों में कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री बहुत ज्यादा प्रदूषण फैला रही है। सीधे और दूसरे रास्ते से जमीन पर पानी छोड़ा जा रहा है। इससे भूजल खराब हो रहा है। जबकि केंद्र सरकार ने इसके नियम लागू किए हैं। पर्यावरण सुरक्षा समिति और यूनियन ऑफ इंडिया ने 22 फरवरी 2017 को ईटीपी जरूरी बताया था।
सीजीडब्ल्यूए की परमिशन तक नहीं : सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यूए) की परमिशन लेनी होती है। सीपीसीबी की जांच में कई एक्सपोर्ट और डाइंग यूनिटों में इसकी अवहेलना मिली। इससे पहले भी आधा दर्जन यूनिटों में इसी तरह की कमी मिली थी। सीपीसीबी ने पर्यावरण प्रोटेक्शन एक्ट-1986 की सेक्शन-5 के तहत कार्रवाई करते हुए क्लोजर नोटिस जारी किए हैं।
पीसीबी के पास 636 यूनिट ही रजिस्टर्ड : हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास 636 यूनिट रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 418 पर ईटीपी लगे हैं। 550 में एयर कंट्रोल डिवाइस लगे हैं। 389 यूनिटों से अति संवेदनशील वेस्ट निकलता है।
पानीपत के पानी में मिल चुका है साइनाइड : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी जांच में पानीपत के पानी को पीने के लिए अयोग्य बता चुकी है। सेक्टर 29 के पानी में साइनाइड की भी 0.3 प्रतिशत मात्रा मिल चुकी है। बावजूद इसके उद्योग अब भी भूजल में प्रदूषित जल छोड़ रहे हैं। उद्योगों के कारण ही यमुना का पानी भी प्रदूषित हो रहा है।
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