पानीपत। जिले का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। दिवाली पर पटाखों के धुएं से बनी स्मॉग की चादर अभी बरकरार है। रविवार को शहर के अधिकतर उद्योग बंद रहे। इसके बावजूद पानीपत प्रदेश का चौथा सबसे प्रदूषित शहर रहा। रविवार को पानीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स 405 दर्ज किया गया। वहीं जींद, हिसार और गुरुग्राम का एक्यूआई पानीपत से भी खराब रहा। गुरुग्राम व पानीपत में वायु में धुएं की मात्रा अधिक पाई गई, जबकि हिसार व जींद की वायु में धूल के कणों की मात्रा अधिक मिली। जींद का एक्यूआई 463 दर्ज किया गया।
दीपावली पर जले पटाखे और उद्योगों के प्रदूषण से बना स्मॉग लोगों के लिए मुसीबत साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि वायु प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने मेें भी दिक्कत हो रही है, वहीं आंखों में जलन की समस्या आम हो गई है। ऐसे में डॉक्टर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो बिना काम के घरों से बाहर न निकलें और मास्क का प्रयोग जरूर करें।
वहीं बढ़ते प्रदूषण स्तर का कारण प्रशासन की लापरवाही भी मानी जा रही है। कारण कि एनजीटी के निर्देशों पर सीपीसीबी ने 10 दिन पहले ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू कर उसके तहत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जब प्रशासन ने सख्ती से ग्रैप के तहत काम नहीं किया तो सीपीसीबी ने एचएसपीसीबी को प्रदूषण फैलाने वाले श्रोत पर कार्रवाई के निर्देश दिए और हर रोज कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी। लेकिन पिछले एक माह में प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी इंडस्ट्री पर कार्रवाई नहीं हुई है।
स्मॉग के कारण बढ़ी आई ओपीडी-
स्मॉक के कारण लोगों को आंखों में जलन हो रही है। इस कारण एलर्जी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक बढ़ चुकी है। अब सिविल अस्पताल में नेत्र रोगियों की ओपीडी 100 पार हो चुकी है। इनमें से अधिकतर बच्चे ही हैं।
किसी भी विभाग ने नहीं निभाई जिम्मेदारी-
नगर निगम को शहर के अंदर सड़कों के किनारे, पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे के किनारे व एएनएचआई को जीटी रोड पर सड़कों के किनारे पानी के छिड़काव का काम सौंपा गया था, लेकिन किसी भी विभाग ने जिम्मेदारी को ईमानदारी से नहीं निभाया। किसी भी सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं हुआ। हवा में धूल के कणों के कारण ही शहर का एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है।
यहां जारी की थी पाबंदी-
ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, शिक्षण संस्थान, मॉल आदि में जेनरेटर सेट पर पाबंदी के निर्देश दिए गए थे। ईपीसीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि हाउसिंग सोसायटी में सिर्फ लिफ्ट के इस्तेमाल में छूट रहेगी। इन निर्देशों का भी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
पानीपत देश का 11 वें नंबर का सबसे प्रदूषित शहर-
एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार पानीपत प्रदेश का दूसरा और देश का 11 वें नंबर का सबसे प्रदूषित शहर है। पानीपत में अवैध रूप से 5 हजार से अधिक फैक्टरियां चल रही हैं। हर रोज यहां से 80 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। साथ ही डाई हाउस में चप्पल व जूते जलाए जाते हैं।
खेतों में काम और वाहनों के आवागमन से बढ़ा एक्यूआई : आरओ
धान और गेहूं बिजाई के सीजन में खेतों में काम चल रहा है। शहर में वाहनों का आवागमन भी ज्यादा है, इसलिए एक्यूआई बढ़ रहा है। ---कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड