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Panipat News: आंखों और दिल की बीमारी लेकर पैदा हो रहे बच्चे, गर्भ के दौरान मां का फोलिक एसिड और आयरन की गोली न लेना बड़ा कारण

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जिला नागरिक अस्पताल में जांच कराते लोग। संवाद - फोटो : Archive
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पानीपत। बदलती जीवनशैली के कारण बच्चे दिल और आंखों की गंभीर बीमारी के साथ जन्म ले रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार 116 बच्चों के ऑपरेशन किए गए हैं। वहीं 2024 में मात्र 56 बच्चों के ऑपरेशन किए गए थे। वर्ष 2024 की अपेक्षा 2025 में दिल में छेद और आंखों की बीमारी के 77 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें भी आंखों की बीमारी के सबसे अधिक 48 बच्चे शामिल हैं। इसका बड़ा कारण मां का गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड और आयरन की गोली न लेना है। मां की यह अनदेखी नवजात पर भारी पड़ रही है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चे को जन्म से ही बीमारियों से बचाव के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को शुरू के तीन महीने आयरन, कैल्शियम व फोलिक एसिड की गोली खानी होती है। इससे नवजात में आयरन, कैल्शियम या प्रोटीन पूरा हो जाता है। आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि महिलाएं इन गोलियों को खाने में लापरवाही बरत रही हैं। ऐसे में बच्चे पर दुष्प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है। बच्चे जन्म से दिल में छेद, आंखों में टेढ़ापन, कटे होंठ या टेढ़े पैरों के विकार के साथ पैदा हो रहे हैं। यह आगे चलकर उनके लिए बड़ी समस्या बन रहा है।
इन्हीं को मिलता है लाभ-
बाल फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सोनल राणा ने बताया कि विभाग की ओर से 18 वर्ष तक के बच्चों का आरबीएसके के तहत नि:शुल्क ऑपरेशन कराए जाते हैं। इसके तहत छह साल तक के बच्चे का कोई दस्तावेज या पंजीकरण की जरूरत नहीं होती है। छह साल से ज्यादा उम्र से बच्चे सरकारी केंद्र, स्कूल या किसी भी संस्थान में पंजीकृत होने जरूरी हैं। सरकारी संस्था में पंजीकृत बच्चों का योजना के अंतर्गत ऑपरेशन या इलाज किया जाता है।
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जागरूकता से बीमारियों पर पाया जा सकता है काबू
जिला नागरिक अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मृति गुप्ता ने बताया कि यदि गर्भावस्था के दौरान समय पर पूरे टीके और विभाग की ओर से दी जा रही सभी दवा ली जाएं तो इन बीमारियों को रोका जा सकता है। महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में जरूर आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की गोली लेनी चाहिए। ये मां के साथ बच्चे के लिए जरूरी होती हैं।
पिछले दो साल में ऑपरेशन का तुलनात्मक आंकड़ा
बीमारी 2024 (वर्ष) 2025 (वर्ष)
दिल में छेद 27 29
आंखों के ऑपरेशन 04 48
तालु-कटे होंठ के 22 12
क्लब फूट (पैर टेढ़ा) होना 00 19
सुनने से संबंधित 01 04
कमर में फोड़े के 00 02
अन्य 02 02
कुल 56 116
नोट :
अस्पताल में आरबीएसके योजना के तहत जरूरतमंदों को लाभ दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में 116 बच्चों के ऑपरेशन कराए गए हैं। इसका पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग की ओर से उठाया जाता है। यदि महिलाएं जागरूक होंगी तो बच्चों को बढ़ती बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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डॉ. विजय मलिक, सीएमओ।

जिला नागरिक अस्पताल में जांच कराते लोग। संवाद- फोटो : Archive

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