सिविल अस्पताल में मेडिकल कराने पहुंचे।
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हरियाणा के पानीपत में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव उग्राखेड़ी में अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति पर मंगलवार को छापा मारा। यहां पर नशा छुड़ाने के लिए 44 युवकों को रखा गया था। आरोप है कि इन युवकों के परिजनों से हर माह 10-12 हजार रुपये वसूले जा रहे थे। इन सभी युवकों को छुड़ाया गया। नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवकों ने आरोप लगाया कि संचालक उनके साथ मारपीट करता था और भर पेट भोजन भी नहीं देता था।
टीम ने इन युवकों को सिविल अस्पताल में दाखिल कराया है। स्वास्थ्य विभाग ने चांदनी बाग थाना पुलिस में आरोपी संचालक के खिलाफ शिकायत दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी संचालक फरार है। गौरतलब है कि जुलाई 2021 में भी इसी केंद्र पर छापा मारकर इसको सील किया गया था लेकिन संचालक ने सील तोड़कर दोबारा नशा मुक्ति केंद्र शुरू कर दिया।
नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवकों ने बताया कि उनको उनके परिजनों ने इस नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल कराया। परिजनों से इसके लिए 10-12 हजार रुपये प्रतिमाह लिए जाते थे। उनके साथ संचालक संजय पाहवा अक्सर मारपीट करता था। जुलाई 2021 से पहले इस केंद्र को गांव उग्राखेड़ी का बिजेंद्र चलाता था। उसके खिलाफ प्रशासन ने केस दर्ज करवा दिया था। फिर बिजेंद्र ने इस केंद्र को संजय पाहवा को किराये पर दे दिया था। यहां एक ही हॉल में 44 युवकों को रखा गया था।
बिना वेंटिलेशन एवं मनोरोग विशेषज्ञ के चल रहा था केंद्र: डॉ. मोना
सिविल अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि उड़न दस्ता, ड्यूटी मजिस्ट्रेट जयपाल सिंह व उन्होंने उग्राखेड़ी के नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा था। यहां संचालक नहीं मिला। यहां 44 युवक मिले । इनको एक हॉल में रखा गया था। वहां वेंटिलेशन भी नहीं था। बिना मनोरोग विशेषज्ञ के ये केंद्र अवैध रूप से चल रहा था।
पिछले साल जुलाई में इस केंद्र को सील कर दिया गया था। दोबारा फिर इसकी सील तोड़कर चलाया जा रहा था। संचालक फिलहाल फरार है। उन्होंने पुलिस को आरोपी संजय पाहवा के खिलाफ शिकायत दी है। फिलहाल युवकों को सिविल अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है।