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Panipat News: नहाए-खाए से आज शुरू होगा छठ महापर्व

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पानीपत। आस्था के चार दिवसीय छठ महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं ने तैयारी लगभग पूरी कर ली है। दिल्ली पैरलल नहर समेत यमुना घाट सजने लगे हैं। घाटों की सफाई की जा रही है। वहीं, छठ महापर्व के लिए बाजारों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी हैं। छठ पूजा से पहले सोमवार को भी बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। शहर के प्रमुख बाजारों व कस्बों की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। वहीं, वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। जाम से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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दीपावली के बाद श्रद्धालुओं को आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ का बेसब्री से इंतजार रहता हैं। नहाए-खाए के साथ ही छठ पूजा की शुरुआत हो जाती है। छठ पूजा का पावन महापर्व मंगलवार पांच नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होगा। आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ के पहले दिन घरों में चावल, लौकी तथा चने की दाल बनाई जाती है। दाल-भात के सेवन के बाद लोग अगले दिन यानी छह नवंबर को खरना की तैयारी में जुट जाएंगे। सात को संध्या अर्घ्य है। आठ को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का समापन किया जाएगा।


कार्तिक मास शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है छठ महापर्व
आस्था का महापर्व छठ पूजा हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। छठ पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता होती है। इस कठिन व्रत को महिलाएं और पुरुष घर में खुशहाली और संतान की सलामती के लिए रखते हैं। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है।
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तीन घाटों पर बड़े कार्यक्रम

पूर्वांचल समन्वय समिति के प्रधान अमित कुमार और मीडिया प्रभारी चंदन सिंह ने बताया कि लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारी जोर शोर से की जा रही है । इस बार घाटों पर अधिक लोगों के होने पर इस वर्ष नगर निगम की ओर से तीन घाटों पर छठ पूजा कार्यक्रम होगा। इनमें असंध रोड पर थर्मल रजवाहे, एनएफएल रजवाहे और बाबरपुर ड्रेन नंबर दो में बड़े घाट बनाए जाएंगे। इनके अलावा दो अन्य स्थानों पर भी छठ महापर्व मनाया जाएगा।

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चार दिन का होगा छठ महोत्सव

5 नवंबर-नहाय खाय
6 नवंबर-खरना

7 नवंबर-संध्या अर्घ्य

8 नवंबर-उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का समापन।


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छठ पूजा का नहाय-खाय आज
नहाय खाए कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान-ध्यान करती है और फिर नहाय-खाय करती है। नहाए खाए के दिन लौकी और भात का प्रसाद बनाने की परंपरा है। इस साल नहाय-खाय मंगलवार पांच नवंबर के दिन होगा।


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अस्ताचलगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा दीपावली से छह दिन बाद की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि वीरवार सात नवंबर की रात 12:41 बजे शुरू होगी और इसका समापन शुक्रवार आठ नवंबर की रात 12:34 बजे होगा। ऐसे में सात नवंबर के दिन ही संध्याकाल का अर्घ्य दिया जाएगा जबकि सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा।
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