पानीपत। प्रशासन ने पुराना औद्योगिक क्षेत्र के साथ लगती इंदिरा विहार कॉलोनी में दो मकानों को बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया। वीरवार को कब्जा हटाने गए अधिकारियों को परिवार ने मकान के कागज भी दिखाए और नेताओं तक गुहार लगाई।
इन सबके बीच प्रशासन ने शाम तक की कार्रवाई में दोनों मकानों को हटाकर जमीन कब्जा मुक्त करा दिया। परिवार के सदस्यों का सर्दी के मौसम बेघर होने पर रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोगों ने कहा कि वे विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे। अब उनके साथ यहां भी पाकिस्तान जैसा कर दिया। वे अब कहां जाएं।
उल्लेखनीय है कि यहां से करीब 70 करोड़ की लागत से पुराना औद्योगिक क्षेत्र से जीटी रोड को जोड़ने के लिए ओवरब्रिज बनाया जाना है। दोनों मकान मालिकों को वक्फ बोर्ड ने गत दिनों नोटिस दिया था। ड्यूटी मजिस्ट्रेट आईटीआई के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार की अगुवाई में पुलिसबल वीरवार को इंदिरा विहार कॉलोनी में पहुंचा। टीम यहां सुबह 11 बजे पहुंच गई। उन्होंने मकान मालिक को कार्रवाई की जानकारी दी। परिवार के सदस्यों ने इसका विरोध किया।
पुलिस अधिकारियों ने उनको समझाया। परिवार के लोगों ने विरोध करने के बाद रास्ता नहीं मिलने पर स्थानीय नेताओं को गुहार लगाई। नेताओं के मदद के लिए न आने पर परिवार ने दुख जताया। प्रशासनिक अमले ने दोपहर बाद एक बजे मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। परिवार के सदस्यों ने इसके साथ अपना सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया।
नहीं दिया मकान तोड़ने का कोई नोटिस ःमकान मालिक इकबाल सिंह ने बताया कि वे पाकिस्तान से आकर पानीपत रहने लगे थे। उनके मकानों की रजिस्ट्री नहीं है। बाकी प्रॉपर्टी आईडी समेत सभी डॉक्यूमेंट हैं। आधा पानीपत इसी तरह से बसा हुआ है। उनके मकानों को निशाना बनाया गया है। चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता आज उनकी परेशानी पूछने तक नहीं आए। हमारे लिए तो यहां पाकिस्तान बन गया।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट आईटीआई के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि परिवार को 15 दिन पहले वक्फ बोर्ड द्वारा नोटिस दिया गया था। उनको मकान खाली कराने को भी कहा गया था । पुलिस ने बुधवार शाम को भी परिवार को कार्रवाई के बारे में अवगत कराया था। परिजनों ने इसको गंभीरता से नहीं लिया।