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मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल सका बाईपास, हर 20 से 50 मीटर पर खिसकी मिट्टी

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सनौली रोड पर ड्रेन नंबर-2 के साथ निकलने वाले गांव छाजपुर से बरसत तक बना 11 किलोमीटर लंबा बाईपास मानसून की पहली बारिश भी नहीं झेल सका। अभी इसके निर्माण को एक वर्ष भी नहीं हुआ और बारिश से सड़क के किनारों की हर 20 से 50 मीटर पर मिट्टी हटने लगी है और सड़क धंसने लगी है।
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जानकारी के अनुसार करीब साढ़े 21 करोड़ रुपये की लागत से बने बाईपास की सड़क के दोनों तरफ के कर्ब ( सड़क के दोनों ओर लगाए जाने वाले सीमेंट के ब्लॉक) , चैनल ( कर्ब के साथ लगाए जाने वाले सीमेंट के ब्लॉक) और क्रैश बैरियर बारिश के बाद कई जगह से धंस गए हैं। सड़क के बीच में कई जगह पर पैचवर्क तक किया जाने लगा है। किनारों की मिट्टी हटने से सड़क धंसने पर उखड़े कर्ब और चैनलों को सड़क के दोनों तरफ सड़क पर ही रखवा दिया गया। जिसका नतीजा ये है कि अभी से बाईपास खस्ताहाल होना शुरू हो गया है। इस बाईपास से आसपास के 8 गांव के ग्रामीणों के साथ ही अन्य लोगों को लाभ मिलता था। अब ये बाईपास लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
- उत्तर प्रदेश से चंडीगढ़ आने जाने के लिए बनवाया गया था बाईपास
उत्तर प्रदेश से करनाल-चंडीगढ़ की ओर आने-जाने वाले वाहनों के लिए बाईपास को बनाया गया था, ताकि वाहनों को शहर के अंदर से न आना-जाना पड़े। इस प्रोजेक्ट की घोषणा मुख्यमंत्री घोषणाओं के कार्यों में की गई थी। जो महज लापरवाही की वजह से परवान नहीं चढ़ पाई। घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीण में रोष है।
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गांव बबैल के ग्रामीणों ने बताया कि बाईपास की सड़क के नीचे बिछाई गई मिट्टी खिसक रही है। हाईवे नीचे से से खोखला हो रहा है। हाईवे की सड़क पर कई जगह पर गहरी दरारें आ गई तो पैचवर्क किया जाने लगा, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
वर्जन-
बाईपास में अनियमितताओं का मामला संज्ञान में आया है। इसका बाईपास का चार्ज मेरे पास कुछ दिन पहले ही आया है। इसका बारीकी से निरीक्षण करवाया जाएगा और जो भी अनियमितताएं होंगी, उनको दूर करवाया जाएगा।
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- रामपाल जागलान, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी, पानीपत।
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