समालखा में स्थानीय निकाय विभाग में भवन निरीक्षक भर्ती के घोटाले की सुनवाई सात नवंबर को लोकायुक्त करेंगे। लोकायुक्त ने शहर स्थानीय निकाय विभाग के तत्कालीन महानिदेशक और हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अधीक्षक को इस सुनवाई के लिए तलब किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर इस घोटाले का खुलासा करते हुए लोकायुक्त को शिकायत दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बुधवार को पत्रकाराें से बातचीत में बताया कि 2010 में स्थानीय निकाय विभाग ने भवन निरीक्षकों के 72 पदों पर नियुक्तियां की थी।
गजट नोटिफिकेशन की खुली अवहेलना करके भवन निरीक्षकों के पद पर सिविल इंजीनियरों के बजाय मेकेनिकल इंजीनियरों की नियुक्तियां कर दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने 24 सितंबर 2010 को भवन निरीक्षकों की शैक्षणिक योग्यता व नियुक्ति के बारे गजट नोटिफिकेशन जारी किया था।
इसके तहत आदेश दिए थे कि भवन निरीक्षक के पद पर केवल सिविल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमाधारक ही नियुक्ति की जाए। लेकिन शहरी स्थानीय निकाय ने इन आदेशों को ताक पर रखते हुए 72 में से 69 पदों पर मेकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमाधारक अपात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी।
कपूर ने बताया कि चार मार्च 2012 को उन्होंने लोकायुक्त जस्टिस प्रीतमपाल को 72 भवन निरीक्षकों की भर्ती में घोटाले की उच्च स्तरीय जांच, अपात्र नियुक्तियां रद्द करने, पात्र उम्मीदवारों की नियुक्तियां करने और घोटाले के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए लिखित शिकायत दी थी।
इस पर संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त रजिस्ट्रार ने मामले की जांच के दौरान शहरी स्थानीय निकाय विभाग के तत्कालीन महानिदेशक को तलब किया और लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। पीपी कपूर ने बताया कि केस की अंतिम सुनवाई लोकायुक्त प्रीतमपाल स्वयं करेंगे।