अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। भजन गुनगुनाने वाली पूर्णिमा ने मुंबई में द वाइस ऑफ इंडिया में सिलेक्ट होकर पानीपत का नाम रोशन कर दिया है। पूर्णिमा के वाइस ऑफ इंडिया में चयनित होने से परिवारजन और अन्य खुशी से गदगद हैं। पुजारी पिता मधुसूदन त्रिपाठी और मां सविता त्रिपाठी को अपनी लाडली पर नाज है।
असंध रोड स्थित शिवपुरी मंदिर में संगीत की स्वर लहरियों को गूंजाने वाली पूर्णिमा ने अब माया नगरी में स्वर वर्षा की तो पानीपत का नाम गूंज उठा। 22 वर्षीय पूर्णिमा ने मधुर स्वर से ‘द वाइस ऑफ इंडिया’ में खुद को साबित कर दिया। उन्होंने देश के 48 प्रमुख बच्चों में नाम दर्ज करा लिया है। पूर्णिमा के वाइस ऑफ इंडिया में सिलेक्ट होने की सूचना रविवार रात को परिवार के सदस्यों को मिली। इसके बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पिता के साथ गुनगुनाती थीं भजन
पिता मधुसुधन त्रिपाठी ने बताया कि वे मूलरूप से अयोध्या के रहने वाले हैं। वे कई वर्षों से पानीपत के असंध रोड शिवपुरी स्थित शिव मंदिर में पुजारी हैं और अब जाटल रोड सावन पार्क में रह रहे हैं। वे मंदिर में भजन करते थे, तो बेटी पूर्णिमा भी साथ में भजन गुनगुनाती थीं। प्रभु के आशीर्वाद से और अभ्यास से उनकी आवाज सुरीली बन गई। वह खुद भी भजनों की प्रस्तुति देने लगीं। मंदिर में उसकी प्रस्तुति को सुनकर श्रोता डटे रहते थे। पूर्णिमा अपने बाल्यकाल में ही जन-जन में अपनी आवाज की वजह से प्रिय हो गई थीं। शिव मंदिर में उसकी सुरीली, मन मोहक आवाज को सुनने वाला मुग्ध हो जाता था।
अवध घराने से संगीत की परंपरागत शिक्षा ली
पिता मधुसुदन त्रिपाठी ने बताया कि पूर्णिमा संगीत के क्षेत्र में आगे आना चाहती थी। उन्होंने भी उसका पूरा सहारा दिया। उसको दिल्ली के एक संगीत संस्थान में दाखिल कराया गया। उसने यहां पर अवध घराने से संगीत अलापों की बारीकियां को समझा।
बीएड करते समय जीते कई पदक
पूर्णिमा शिक्षा के क्षेत्र में भी खुद को साबित करती है। परिजनों ने बताया कि उसकी शिक्षा के प्रति शुरू से ही रुचि रही है। उसने शहर के आर्य पीजी कॉलेज से एमकॉम की और अब एक कॉलेज से बीएड कर रही है। उसने अपने स्कूल और कॉलेज के जीवन में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त किए। पूर्णिमा ने यूथ फेस्टिवल में राष्ट्र स्तर पर अपनी आवाज के रंग बिखेरे।