फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बरसत रोड प्रकरण : कोर्ट ने 26 तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बोले-जमीन अधिग्रहण की फाइल शासन को भेजी

विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। बरसत रोड की जमीन पर कब्जे के लिए अदालत में चल रहे एक मामले में लोक निर्माण विभाग ने जमीन अधिग्रहण करने पर सहमति जताई है। विभागीय अधिकारियों ने अदालत में दावा किया है कि सरकार से ड्राफ्ट नोटिफिकेशन की मंजूरी मांगी गई है। जिस पर अदालत ने कहा कि प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। अदालत ने 26 फरवरी की सुनवाई पर अब तक की प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उधर, एक अन्य मामले में किसान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुआवजा तय करने से पहले जमीन अधिग्रहण करने की मांग की है।
विज्ञापन

बरसत रोड का निर्माण 1960 में हुआ था। उस समय लोक निर्माण विभाग ने कुछ किसानों की जमीनों को बिना अधिग्रहण किए ही सड़क बना दी थी। बाद में किसानों ने सड़क की जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए अदालत में याचिका दाखिल की थी इन्हीं में से एक केस रघुबीर सिंह बनाम राज्य में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई हुई थी। लोकनिर्माण विभाग के एसडीओ ने अदालत में प्रस्तुत होकर बताया था कि विभाग जमीन को अधिग्रहण करने के लिए तैयार है। इसके लिए फाइल तैयार कर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के लिए सरकार को भेजी गई है। नोटिफिकेशन होने के बाद जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। जिस पर अदालत ने कहा 26 फरवरी को इस मामले में सुनवाई की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में अब तक हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, साथ ही आदेश 22 नियम 3 सीपीसी के तहत लंबित आवेदन पर भी विचार किया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2013 से लंबित है और इसमें भूमि अधिग्रहण से संबंधित कार्रवाई को लेकर विवाद चल रहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि अगली तारीख तक संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकते हैं। अदालत ने विभागीय अधिकारियों को प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए हैं।
विज्ञापन


मुआवजा जमा करने का मामला हाईकोर्ट में पहुंचा
इससे पहले एक अन्य मामले में भारत भूषण बनाम राज्य सरकार प्रकरण में सुनवाई करते हुए अदालत ने 13 फरवरी को आदेश जारी किए थे। अदालत ने लोक निर्माण विभाग को किसान की 3628 गज जमीन का 1.53 करोड़ रुपये अदालत में जमा करने के आदेश दिए थे, लेकिन डिक्री होल्डर ने अदालत में मुआवजा लेने से इन्कार कर दिया था। डिक्री होल्डर राजकपूर का कहना है कि एक ही जमीन के अलग-अलग मामलों में अदालत अलग-अलग आदेश दे रही है। एक मामले में सरकार किसान को जमीन पर कब्जा दे चुकी है। वहीं एक मामले में जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन उनके मामले में बिना अधिग्रहण किए ही मुआवजा तय किया गया। उन्होंने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें