उमेश त्यागी/विपिन त्यागी
बापौली। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल द्वारा गोद लिया गया ऐतिहासिक गांव बापौली विकास के दावों के बीच बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। महाग्राम योजना के तहत शहर जैसी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी हालात इससे उलट हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है। महाग्राम योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन बिछाई गई थी, ताकि गांव को गंदे पानी की समस्या से राहत मिल सके।
इसके बाद टूटी सड़कों और गलियों के निर्माण पर भी लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च किए गए। बावजूद इसके सीवर लाइन चालू न होने से गंदा पानी गलियों में भर रहा है, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।
कूड़े के ढेर और बदहाल तालाब दे रहे बीमारियों को न्योता
गांव की बड़ी समस्या कूड़ा निस्तारण (वेस्ट मैनेजमेंट) की उचित जगह न होना है। गांव में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे उठने वाली सड़ांध ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर रखा है। इसके अलावा, गांव के चार तालाबों की खुदवाई कर उनकी साफ-सफाई तो कराई गई है, लेकिन आज भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। गंदा पानी इन्हीं तालाबों में ओवरफ्लो होकर जमा रहता है। प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, अब तक गांव के बेजुबान पशुओं के लिए पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। संवाद
बापौली गांव में हमारी ओर से विशेष सफाई व जागरूकता अभियान चलाया गया है। सीवर लाइन और पानी निकासी की जो भी तकनीकी दिक्कतें हैं, उन्हें जल्द ही दूर कर लिया जाएगा ताकि ग्रामीणों को परेशानी न हो। -शक्ति सिंह, बीडीपीओ, बापौली।
सीवर बिछाने के समय हमें लगा था कि अब दिन बहुरेंगे। लेकिन 10 करोड़ का सीवर बस जमीन में दबा कर छोड़ दिया गया। गंदा पानी आज भी हमारी देहरी तक आ रहा है। -डेविड रावल
सड़कों और गलियों पर ढाई करोड़ रुपये लगा तो दिए, लेकिन जब पानी की निकासी ही नहीं है, तो नई बनी सड़कें भी जगह-जगह से धंसने लगी हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी पैसे की बर्बादी है। -सोनू
गांव में चारों तरफ गंदगी है। कूड़ा कहां डालें, कोई निश्चित जगह नहीं है। बच्चे बीमार हो रहे हैं और मच्छर और मक्खियों के कारण घरों में बैठना मुश्किल हो गया है। -रामपाल रावल
महाग्राम योजना के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई है। तालाबों की सफाई के नाम पर बजट तो पास हो जाता है, लेकिन धरातल पर पशुओं के पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है। -राजबीर रावल
अधिकारी सिर्फ चक्कर काट कर चले जाते हैं। कूड़ा निस्तारण के लिए उचित प्लांट या जगह नहीं बनती और सीवर व्यवस्था को चालू नहीं किया जाता, तब तक योजनाएं काम की नहीं हैं। -रामबीर रावल
गांव में बने संजय पार्क की देखरेख तक नहीं जाती। तमाम लोग मवेशी तक ले जाने लगे हैं। प्रशासन का शिकायत करने के बाद भी समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं है। -मदन फौजी
रामबीर रावल
रामबीर रावल
रामबीर रावल
रामबीर रावल
रामबीर रावल
रामबीर रावल
रामबीर रावल