पानीपत। जिले में स्मॉग व प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर एप के मुताबिक एयर क्वालिटी इंडेक्स नहीं बढ़ रहा है। एप के अनुसार अक्तूबर पिछले तीन वर्ष में सबसे अधिक स्वच्छ रहा है, जबकि स्मॉग व प्रदूषण में कमी नहीं आई है। पानीपत के पड़ोसी जिले करनाल, सोनीपत, जींद व कुरुक्षेत्र में एक्यूआई रेड व ऑरेंज जोन में है, लेकिन जिस जिले में 20 हजार फैक्टि्रयां हों और प्रतिदिन एक लाख वाहन गुजरते हैं, वहां का एक्यूआई अक्तूबर में 11 दिन ग्रीन जोन में रहा, 14 दिन येलो जोन व एक दिन ऑरेंज जोन में रहा। छह दिन सीपीसीबी के समीर एप पर एक्यूआई प्रदर्शित नहीं किया गया। समीर एप में पहली बार बुधवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स ऑरेंज जोन में 292 दर्शाया गया है। पर्यावरण मामलों के एक्सपर्ट सीपीसीबी की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। पर्यावरण मामलों के एक्सपर्ट का कहना है कि प्रदूषण मापक यंत्रों में कुछ गड़बड़ी है। इसलिए एक्यूआई सही नहीं दर्शाया जा रहा है। असल में पानीपत का एक्यूआई 350 से अधिक है।
इस साल सीपीसीबी के अनुसार पानीपत की आबोहवा पिछले पांच वर्ष की तुलना में अधिक स्वच्छ रही है। प्रदूषण का स्तर 50 प्रतिशत कम है। 2019 से 2022 तक अक्तूबर का औसतन एक्यूआई 180 था, जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना गया है। इस वर्ष औसत एक्यूआई 90 रहा है जो कि ग्रीन जोन में है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। पिछले वर्ष अक्तूबर बेहद प्रदूषित रहा। 2022 अक्तूबर में अधिकतम एक्यूआई 348 था। पिछले साल एक दिन रेड जोन में, चार दिन ग्रीन जोन में, तीन दिन ऑरेंज जोन में व 23 दिन येलो जोन में था। इससे पहले लगातार चार दिन एक्यूआई 100 अंक से कम ग्रीन जोन में रहा। स्थिर एक्यूआई से उद्यमियों ने राहत की सांस ली है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से भी उद्यमियों को राहत मिली है। इस साल अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को किसी भी उद्योग पर पर्यावरण नियमों के तहत कार्रवाई नहीं करनी पड़ी है।
शहर का एक्यूआई 350 से अधिक है। ऐसे में संभव नहीं है कि पड़ोसी जिलों का एक्यूआई रेड व ऑरेंज जोन में हो और पानीपत का एक्यूआई ग्रीन व येलो जोन में हो। हो सकता है यंत्रों के सेंसर काम न कर रहे हैं।
- डॉ. राजेंद्र सिंह, एक्सपर्ट पर्यावरण संंबंधी मामले।
बुधवार को शहर का एक्यूआई 292 रहा। यह ऐप पर अपडेट हो रहा है। यंत्रों में कोई खामी नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर काम किया जा रहा है। एक्यूआई का बढ़ना खास तौर पर मौसम पर निर्भर करता है।
- प्रदीप कुमार, एसडीओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड