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जनवरी में एक्यूआई औसतन 120, उद्योगों पर प्रतिबंध का विरोध

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पानीपत। कोरोना के प्रभाव व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पाबंदियों से उद्यमियों में निराशा है। सीपीसीबी की पाबंदियों के कारण उद्यमी अब तक भी सप्ताह में पांच दिन ही उद्योग चला पा रहे हैं। लाइट जाने के बाद उद्योगों में जेनरेटर सेट नहीं चला पा रहे हैं। शहर में नाइट कर्फ्यू भी है। इन सभी पाबंदियों का प्रभाव उद्योगों पर पड़ रहा है।
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उद्यमी समय पर ऑर्डर तैयार नहीं कर पा रहे। यह भी चर्चाएं हैं कि कई श्रमिक परेशान होकर पलायन भी कर चुके हैं। उद्यमियों की मांग है कि सरकार उद्योगों को सातों दिन चलने की अनुमति दें, अभी पांच दिन उद्योगों को चलाने की अनुमति है। दो दिन श्रमिक घर बैठते है, जनरेटर सेट चलाने पर प्रतिबंध है। इसलिए उत्पादन भी 30 प्रतिशत तक कम हो रहा है। उद्योगों को एक शिफ्ट में चलाना पड़ रहा है।
जनवरी का एक्यूआई औसतन 120, फिर भी प्रतिबंध जारी
जिले का एक्यूआई जनवरी में करनाल, अंबाला, कुरुक्षेत्र व हिसार जैसे जिलों से बेहतर रहा है। जनवरी में छह दिन एक्यूआई ग्रीन जोन में रहा, आठ बार येलो जोन में रहा। जबकि 10 दिन ऑरेंज जोन में रहा है। बावजूद इसके सीपीसीबी की पाबंदियां जारी है। उद्यमियों की मांग है कि पानीपत को एनसीआर से बाहर किया जाए।
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दो बार विधायक से मिल चुके हैं उद्यमी-
सीपीसीबी की पाबंदियों को हटाने के लिए उद्यमी दो बार विधायक प्रमोद विज से मिल चुके हैं। विधायक डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से मिल चुके हैं लेकिन सीपीसीबी ने सरकार के हस्तक्षेप पर भी गंभीरता नहीं दिखाई। पिछले डेढ़ माह से यहां प्रतिबंध जारी है।
परेशान कर रही सीपीसीबी
सीपीसीबी परेशान कर रही है। उन्हें सप्ताह में पांच दिन ही उद्योगों को चलाने की अनुमति है। उत्पादन कम हो रहा है। जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध लगाया है। पानीपत का एक्यूआई जनवरी में दूसरे जिलों से बेहतर रहा है। फिर भी प्रतिबंध जारी है। उनकी सरकार से मांग है कि इसमें हस्तक्षेप करें और प्रतिबंध हटाए।
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भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
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