पानीपत। ठेकेदार से बिल पास की करने की एवज में 1.75 लाख रुपये की रिश्वत के साथ पकड़े आरोपी एडीसी कार्यालय में तैनात सहायक योजना अधिकारी (एपीओ) ईश्वर सिंह की उसी दिन दिन शाम को पदोन्नति होनी थी। उनके पदोन्नति की फाइल निदेशक की टेबल पर थी। इससे पांच घंटे पहले ही रिश्वत के आरोप में पकड़े गए।
विभाग ने फिलहाल उनकी पदोन्नति को रोक दिया और उनके निलंबन के आदेश कर दिए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की प्रथम दृष्टया सामने आया कि आरोपी ने ठेकेदारों के बिल पर सवा महीने पहले एडीसी के हस्ताक्षर करा लिए थे। वह अधिकारियों का नाम लेकर ठेकेदार पर पैसों का दबाव बना रहा था।
एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने एपीओ ईश्वर सिंह के 1.75 लाख रुपये की रिश्वत मामले की जांच की। एसीबी के सामने आया कि आरोपी ईश्वर सिंह ने एडीसी के 27 मई को ठेकेदार बालकिशन के बिलों पर हस्ताक्षर करा लिए थे। उसने इसके बाद फाइल को अपने पास रख ली थी। ठेकेदार ने उनसे बिल पास करने की मांग की तो उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष की ग्रांट लैप्स हो गई है।
इनको पास कराना मुश्किल है। नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारियों को तैयार करना पड़ेगा। ठेकेदार बालकिशन ने बताया कि करीब 18 लाख के बिलों पर 10 प्रतिशत कमीशन रिश्वत के रूप में लेने की मांग की। वह अपनी पेमेंट के लिए उनकी बातों में आ गए। उनको 22 जून को 15 हजार रुपये भी दिए। वह रिश्वत के पैसों की बार-बार मांग कर रहा था। वहीं विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ईश्वर सिंह पदोन्नत होकर जिला योजना अधिकारी बनने थे। उनकी पदोन्नति की फाइल पर उसी दिन हस्ताक्षर होने थे। उन्होंने कुरुक्षेत्र जिला योजना अधिकारी लगने की इच्छा जाहिर की थी। विभाग के एक जानकार ने बताया कि आरोपी एपीओ पिछले छह महीने से हर बिल पर कुछ न कुछ आपत्ति लगाकर रोक रहा था।