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Panipat News: 650 एकड़ की नगरी में स्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन की मिसाल

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संत निरंकारी समागम में कचरा प्रबंधन की जानकारी देते स्वयंसेवक। संवाद
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जगमहेंद्र सरोहा
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भोड़वाल माजरी (पानीपत)। समालखा के भोड़वाल माजरी गांव में करीब 650 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली संत निरंकारी मिशन आध्यात्मिक नगरी इन दिनों दिव्यता, भक्ति और सेवा का केंद्र बनी हुई है। चार दिवसीय वार्षिक निरंकारी संत समागम में जिस बात ने सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया है, वह है संत निरंकारी मिशन का असाधारण स्वच्छता और कचरा प्रबंधन।
जहां बड़े-बड़े निकाय संस्थान करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इतने बड़े आयोजनों में व्यवस्था बनाए रखने में संघर्ष करते हैं, वहीं निरंकारी मिशन के स्वयंसेवकों ने आपसी एकजुटता और अनुशासन से एक बेहतरीन और अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। मिशन स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में लैगून प्रक्रिया को अपनाता है।
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समागम स्थल पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यहां कचरे के उचित संग्रहण से लेकर उसके वैज्ञानिक निपटान तक की व्यापक और चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। संत निरंकारी मिशन के सचिव जोगिंद्र सुखीजा ने बताया कि मिशन हर आयोजन की सफलता के लिए पहले से ही सूक्ष्म योजना तैयार करता है। इसके तहत अलग-अलग टीमों का गठन किया जाता है और हर टीम के ऊपर समन्वयकों की नियुक्ति होती है। यह व्यवस्थाओं पर बारीकी से नजर रखते हैं।
यही कारण है कि विशाल प्रांगण होने के बावजूद पूरे परिसर में गंदगी का नामोनिशान नजर नहीं आता। इसमें स्वयंसेवकों के साथ-साथ हर श्रद्धालु का सहयोग भी शामिल रहता है। संत निरंकारी मिशन का यह कचरा प्रबंधन तंत्र साबित करता है कि अटूट श्रद्धा, जन-सहयोग और सुव्यवस्थित सोच के साथ बड़े पैमाने पर भी प्रकृति की रक्षा और स्वच्छता को कैसे बरकरार रखा जा सकता है।

यह है लैगून प्रक्रिया
लैगून प्रक्रिया अपशिष्ट जल और जैविक कचरे के पर्यावरण-अनुकूल और प्राकृतिक उपचार की एक वैज्ञानिक विधि है। इसके तहत गंदे पानी या तरल वेस्ट को बड़े-बड़े खुले तालाबों (लैगून) में एकत्र किया जाता है। सूर्य के प्रकाश, प्राकृतिक ऑक्सीजन और विशेष सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया) की मदद से इसमें मौजूद जैविक पदार्थों का स्वतः विघटन होता है। इस जैव रासायनिक प्रक्रिया के बाद उपचारित किए गए तरल वेस्ट (पानी) को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर पौधों की सिंचाई और हरियाली बनाए रखने के उपयोग में लाया जाता है।

कचरा प्रबंधन और दैनिक अपशिष्ट का आकलन
समागम में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं और लंगर तथा भोजन की व्यवस्था चलती है। भारी मात्रा में जैविक, तरल और शुष्क कचरा उत्पन्न होता है। अनुमान के मुताबिक, ऐसे आयोजनों में प्रतिदिन 100 टन के हिसाब से कचरा निकलता है। इसके प्रबंधन के लिए मिशन ने त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई है। जैविक अपशिष्ट में खान-पान की वस्तुओं और लंगर से निकलने वाले जूठन व कचरे को अलग कर उससे पर्यावरण के अनुकूल उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार की जाती है।
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प्लास्टिक वेस्ट प्लास्टिक या अन्य अजैविक कचरे के प्रभावी निपटान के लिए पंजीकृत वेंडरों और एजेंसियों को अधिकृत किया गया है। वे इसके रीसाइक्लिंग और उचित निष्पादन का कार्य संभालते हैं।

समर्पित स्वयंसेवक दल : कचरे की छंटाई से लेकर उसके समयबद्ध ट्रीटमेंट तक के लिए विशेष प्रशिक्षित टीमें मुस्तैद रहती हैं।
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