सिविल अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के बाद नवजात की मौत हो गई। नवजात ने एक दिन पहले ही जन्म लिया है। परिजनों ने डॉक्टरों व स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाकर सिविल अस्पताल में रोष प्रदर्शन किया। परिजनों ने डॉक्टरों व स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की। परिजन डॉक्टरों की शिकायत देने सिटी पुलिस थाना में भी गए, लेकिन वहां एसएचओ नहीं मिले इसलिए बिना शिकायत ही लौट आए।
गांव कचरौली निवासी रविंद्र ने बताया कि उसकी डेढ़ साल पहले शीतल के साथ शादी हुई थी। शीतल नौ माह की गर्भवती थी। शुक्रवार रात को प्रसव पीड़ा के बाद शीतल को रात सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था। शनिवार सुबह 10 बजे शीतल ने बेटे को जन्म दिया था। बच्चा बिल्कुल स्वस्थ था। उन्होंने रविवार सुबह छुट्टी मांगी तो डॉक्टरों ने कि छुट्टी से पहले नवजात को इंजेक्शन लगवा लें। स्टाफ नर्सों ने बच्चे को इंजेक्शन दिया इसके कुछ समय बाद ही बच्चे की मौत हो गई। जब उन्होंने डॉक्टरों से इस बारे में शिकायत की तो डॉक्टरों ने उल्टा उन्हीं की गलती निकाल दी। डॉक्टरों ने उन्हें कहा कि जब बच्चे का वजन दो किलोग्राम से कम था तो इंजेक्शन क्यों लगवाया। वह डॉक्टरों की शिकायत देने सिटी थाना में गए। यहां पर एसएचओ नहीं मिले। इसलिए वो बिना शिकायत दिए ही घर लौट गए। उनके बेटे की मौत डॉक्टरों व स्टाफ की लापरवाही से हुई है। मामले में पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने बताया कि मेरे पास शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।