सरकार ने उद्यमियों की मांग पर शहर को एनसीआर से बाहर करने पर मोहर लगा दी है। सरकार ने इस प्रस्ताव को पास कर एनसीआर कमेटी को भेज दिया है। अगर कमेटी में ये प्रस्ताव पास होता है तो शहर के 12 हजार उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि यहां के उद्यमी एनसीआर के नियमों से परेशान हैं। नियमों के अनुसार उद्योगों को 30 सितंबर तक पीएनजी पर शिफ्ट करना है। पीएनजी पर शिफ्ट नहीं होने वाले उद्योगों में ताला लगाने की चेतावनी दी गई है। फिलहाल स्थिति यह है कि शहर में दो हजार में से महज 20 उद्योग ही पीएनजी पर शिफ्ट हो पाए हैं।
जिले के पांच में से तीन तहसीलों के एरिया को एनसीआर में शामिल करने का नेशनल सेंट्रल रीजन यानी एनसीआर ने प्रस्ताव रखा है। इसके तहत जिले की इसराना, बापौली और समालखा तहसील को एनसीआर में शामिल किया जाना है। जिले के इन तीन तहसीलों का एरिया करीब 52.9 प्रतिशत है, जबकि पानीपत और मतलौडा तहसील एनसीआर से बाहर रहेंगी। इन दोनों तहसीलों का क्षेत्र 47.1 प्रतिशत है। ऐसे में जिले के कुल 1268 किलोमीटर एरिया में से दिल्ली की ओर लगने वाले 671 किलोमीटर को एनसीआर में शामिल करने को लेकर पत्राचार किया गया है, जिसका नक्शा भी जारी किया गया है।
विदित हो कि दिल्ली राजघाट से लेकर प्रदेश के 100 किलोमीटर तक के आने वाले एरिया को एनसीआर में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस एरिया में तकरीबन पानीपत जिले का 90 प्रतिशत एरिया शामिल था। इसके बाद एनसीआरपीबी की 41वीं बोर्ड बैठक में इसे संशोधित करने का फैसला लिया गया, जिसमें पानीपत और मतलौडा तहसील के एरिया को छोड़ दिया गया है।
समालखा में 31 गांव और 63 कॉलोनियां शामिल हैं। वहीं, इसराना तहसील के अंतर्गत करीब 13 कॉलोनियां और 29 गांव आते हैं। इसके अलावा बापौली तहसील में करीब 49 गांव आते हैं, जिनको एनसीआर में आने से विकास कार्यों का लाभ मिलेगा। वहीं, 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल के वाहन बंद होने का नुकसान भी होगा।
एनसीआर में होने के कारण पानीपत के उद्योगों पर हर साल ग्रैप लागू होता है। साल में दो माह उद्योग बंद रहते हैं। इससे हर साल उद्योगों को करोड़ों का नुकसान होता है।