हुडा सेक्टर-11/12 में दो बच्चियां कोठी में आग लगने से जिंदा जल गईं।
ये बच्चियां अपने नाना-नानी के घर गर्मियों की छुट्टियां बिताने आई दो मौसेरी बहन कोठी में हुई आग की घटना में जिंदा जल गई।
घटना में उनके मौसेरे बहन-भाई बाल-बाल बच गए। मरने वाली दोनाें बच्चियाें की उम्र 11 और 13 साल थी और मरने वाली एक लड़की सेक्टर-24-डी चंडीगढ़ और एक पंचशील नगर अजमेर की रहने वाली थी। हादसे के वक्त परिवार का कोई बड़ा सदस्य घर पर नहीं था।
दोनों के शव बेड के साथ नीचे पड़े थे। हादसा मकान के मैदानी तल स्थित ड्राइंग रूम में रखे पॉलिस्टर के कपड़े में आग लगने से हुआ। आग के कारणों का अब तक पता नहीं लग पाया है।
घटना रविवार सुबह साढ़े आठ बजे की है। सेक्टर-11/12 स्थित सतपाल सेठी के मकान में अचानक धुएं के गुब्बार और आग की लपटें उठने लगीं और हाहाकार मच गया। पुलिस और दमकल विभाग की टीम सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची।
आग की लपटों में सांची (11) निवासी सेक्टर-24-डी चंडीगढ़ और खुशी (13) निवासी पंचशील नगर अजमेर जिंदा जल गई और सतपाल सेठी की बेटी तानिया और बेटा तुषार छत से होकर दूसरे मकानों में कूद गए।
दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और दोनों बच्चियों के शवों को निकालकर शवगृह में भिजवाया।
सतपाल सेठी ने बताया कि वह और उसका भाई कृष्ण एक ही मकान में रहते हैं और उसका ससुर दौलत राम सेक्टर-12 में रहता है। उसकी साली कंचन निवासी पंचशील नगर अजमेर और प्रीति निवासी सेक्टर-24-डी चंडीगढ़ से अपने बच्चों के साथ मायके आई थी।
उसकी पत्नी मंजू, साली कंचन और प्रीति अपने मायके में सो गईं और उसकी बेटी तानिया, बेटा तुषार और दोनों सालियों की लड़कियां खुशी और सांची उसके मकान में आ गई। वह सुबह अपने दोनों भाइयों के साथ बिजनेस के सिलसिले में चला गया और कुछ देर बाद ही मकान के मैदानी तल में रखे सामान में आग गई।
इसमें उसकी साली की लड़कियां खुशी और सांची की मौत हो गई। खुशी सातवीं कक्षा और सांची छठी कक्षा में पढ़ती थी। हादसे की सूचना के बाद तीनों के परिवारों में मातम छा गया। चांदनी बाग थाना पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज करने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया।
थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुडा सेक्टर-11/12 स्थित एक कोठी में आग लग गई। आग ड्राइंग रूम में रखे कपड़े से भड़क गई। इसमें खुशी निवासी पंचशील नगर अजमेर और सांची निवासी चंडीगढ़ की मौत हो गई और दो भाई बहन बाल-बाल बच गए। पुलिसकर्मियों और दमकलकर्मियों की मदद से आग पर काबू पाया।
रामकुमार, प्रभारी, थाना चांदनी बाग पानीपत
दिन भर उठती रहीं आग की लपटें
शहर में आग की घटनाओं से दिनभर हड़कंप मचा रहा। शहर के हुडा सेक्टर 11/12 में आग की घटना में दो मौसेरी बहनें के जिंदा जल गईं और मकान में रखा सामान खाक हो गया। इसके बाद सेक्टर-18 स्थित एक कोठी में बिजली के पैनल में आग लग गई।
यहां पर बुजुर्ग व्यक्ति की सजगता के चलते बड़ा हादसा होने से बच गया। दमकलकर्मियों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। सुबह सेक्टर 11/12 में प्रशासन की तरफ से एसडीएम सुभाष श्योराण और तहसीलदार हरिओम अत्री पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए और कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
पिता आौर परिजनों का रोकर बुरा हाल
खुशी और सांची के जिंदा जलने के बाद दोनों के माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां कंचन और प्रीति थामे से भी नहीं थम रहीं।
वहीं, सांची के पिता नवीन का भी रो-रोकर बुरा हाल है। वे चंडीगढ़ से सीधे सिविल अस्पताल में पहुंचे थे। वहीं खुशी के पिता विजय सूचना मिलते ही जयपुर से पानीपत के लिए निकल पड़े। वहीं सतपाल सेठी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। सतपाल ने बताया कि हादसे में उसकी दो सालियों की बेटियों की मौत हो गई। अब सब उसको जिम्मेदार ठहराएंगे और वह उनको कैसे मुंह दिखाएगा।
28 को ही आई थीं दोनों बहनें
परिजनों ने बताया कि कंचन और प्रीति 28 को ही अपने मायके आई थीं और अपने पिता दौलतराम के सेक्टर-12 स्थित मकान में थी। उनकी सेक्टर-11 में रहने वाली बहन मंजू भी उनके पास आ गई। तीनों बहन लंबे अरसे बाद मिलने पर बेहद खुश थी। यही खुशी बच्चों में भी थी।
तीनों बहन कंचन, प्रीति और मंजू बीती रात को सुख-दुख की सांझा करने के लिए अपने पिता के घर पर ही रह गईं। परिजनों ने बताया कि चारों बच्चे रात करीब नौ बजे अपने नाना के घर से आए थे और यहां पर आकर देर रात तक टीवी देखा था।
सेक्टर-18 में बड़ा हादसा बचा
सेक्टर-18 स्थित एक ट्रांसपोर्टर की कोठी में दोपहर के वक्त आग लग गई। आगजनी की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और दमकलकर्मी दौड़ पड़े।
दमकलकर्मियों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि नरेंद्र के सेक्टर-18 स्थित मकान में बिजली के पैनल में आग लग गई। उस वक्त नरेंद्र के पिता भीम सिंह घर पर थे। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार राजबीर और सेक्टर 6/7 चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे। दमकलकर्मियों ने आधे घंटे में आग पर काबू पाया।
थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुडा सेक्टर-11/12 स्थित एक कोठी में आग लग गई थी। आग ड्राइंग रूम में रखे कपड़े से भड़क गई। इसमें खुशी निवासी पंचशील नगर अजमेर और सांची निवासी चंडीगढ़ की मौत हो गई और दो भाई बहन बाल-बाल बच गए। पुलिसकर्मियों और दमकलकर्मियों की मदद से आग पर काबू पाया।
रामकुमार, प्रभारी, थाना चांदनी बाग पानीपत
खराब सिस्टम से लड़कर बचा लीं कर्द जान
दमकल विभाग के खराब सिस्टम और खस्ता गाड़ियों के चलते हैंडलूम व्यापारी के हुडा सेक्टर-11 कोठी में लगी आग में जख्म बेशक गहरा कर दिया, पर दमकलकर्मियों, एंबुलेंस टीम और पुलिसकर्मियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए आग पकड़ने वाले उपकरणों को निष्क्रिय कर दिया।
एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी और चालक ने दोनों बच्चियों के शवों को आग की लपटों से जूझकर बाहर निकाला। इस दौरान कई कर्मी और लोग कांच लगने से घायल तक हो गए। कर्मियों के आपसी सहयोग से आसपास के मकानों के लोगों को भी नुकसान होने से बचाया जा सका।
सेक्टर-11 निवासी उद्यमी सतपाल सेठी के घर में आग लगते ही लोगों ने दमकल विभाग को सूचना देने के लिए फोन मिलाया। तकनीकी कारणों से पानीपत ऑफिस में मिलाया फोन करनाल दमकल विभाग में जा मिला। लोगों ने उनको पानीपत में सूचना देने की बात कही, लेकिन करनाल के कर्मियों ने खुद सूचना देने को कही।
इसके बाद पानीपत से पहुंची दमकल गाड़ी से पानी का प्रेशर नहीं बन सका। दमकलकर्मी भी मास्क और अन्य उपकरण के बिना ही पहुंचे थे। इसी समय एंबुलेंस के चालक मनोज निवासी आजाद नगर और ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) देवेंद्र निवासी निंबरी और बलराज पहुंच गए। उधर से चांदनी बाग एसएचओ रामकुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे।
कोठी नंबर 605 से आग की लपटे और धुएं के गुब्बार उठ रहे थे। कई लोगों ने आगे बढ़ने की कोशिश की। लेकिन वे हिम्मत नहीं जुटा सके। ईएमटी बलराज ने अपने कपड़ों को पानी में भिगोया और दूसरे ईएमटी मनोज के साथ मकान में दाखिल हो गया।
वहीं, एसएचओ चांदनी बाग रामकुमार ने कर्मियों को साथ लेकर बांस के साथ मकान के शीशे तोड़े और धुआं बाहर निकलने का रास्ता बनाया। इसी समय थाना शहर प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश सैनी और मॉडल टाउन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रवि खुंडिया भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी बाहर खड़े लोगों को संभाला।
लगातार 36 घंटे से दे रहा था ड्यूटी
मैं लगातार 36 घंटे से ड्यूटी दे रहा था और रविवार सुबह घर जाने की तैयारी में था। उसने दूसरे ईएमटी देवेंद्र के आने के बाद चाय पीने की इच्छा जताई। वे चाय का इंतजार कर रहे थे। इसी समय आग की सूचना मिली। चालक मनोज एंबुलेंस ले आए और देवेंद्र उसमें बैठ गया।
उसने कोठी से आग की लपटें उठती देखी। सब लोग पीछे-पीछे हट रहे थे। उसने अपने कपड़ों और अपने साथी के कपड़ों पर पानी डाला को अंदर कूद गए।
वे आग की लपटों से बचते-बचाते प्रथम तल पर बने आखिरी कमरे में पहुंचे। यहां पर खुशी और सांची बेड से नीचे पड़ी थी। उनको कुछ राहत मिली और उनको बचाने के लिए आगे बढ़े, लेकिन दोनों बुरी तरह से झुलसी थीं और उनमें सांसे भीं नहीं थी।
किसी ने गाड़ी निकाली, किसी ने सिलेंडर
सतपाल सेठी का मकान दो गली में है और उसका भाई कृष्ण भी उसी मकान में रहता है। कृष्ण की पत्नी और बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में बाहर गए थे और सतपाल के बच्चे यहीं थे।
बताया जा रहा है कि उनकी वैगन-आर गाड़ी और एक मोटरसाइकिल मकान में थी। कई लोगों ने की चाबी नहीं मिलने पर उसके शीशे तोड़कर बाहर निकाला और फिर मोटरसाइकिल को बाहर निकाला। कुछ लोगों ने रसोई में रखे सिलेंडर को बंद कर आग पर काबू करने का प्रयास किया।
आसपास के लोगों की थमी रहीं सांसें
आग की घटना के बाद आसपास के लोगों की भी सांसें थमी रहीं। वहीं पॉलिस्टर में लगी आग से निकलने विषैले धुएं से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। लोगों को सिलेंडर या आग बढ़ने पर आसपास फैलने का भी बहुत डर था। दमकलकर्मियों ने चार गाड़ियों के साथ कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।