पानीपत। जिले के 900 से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों में नामांकन कराने के बाद आठवीं के बाद हर वर्ष आधे से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ देते हैं। यह आंकड़ा 53 फीसदी है। आठवीं के बाद के आंकडे़ और भी चिंताजनक हैं। बाकी 47 फीसदी ने नौवीं और 10वीं कर भी लिया तो 11वीं और 12वीं में 30 फीसदी विद्यार्थियों की संख्या और कम हो जाती है। समग्र शिक्षा की दिशा में यह बड़ी रुकावट है।
शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यू-डाइस) के आंकड़ों के अनुसार यह पानीपत की वर्तमान स्थिति है। वर्ष 2018-19 और 2019-20 के आंकड़ों को देखें तो ऐसा नहीं है कि पढ़ाई छोड़ने में लड़के और लड़कियों की संख्या में कोई कम या ज्यादा है। जितने नामांकन हो रहे हैं, उनमें से लड़के और लड़कियां करीब-करीब बराबर संख्या में पढ़ाई छोड़ देते हैं। हालांकि नामांकन कराने में लड़कियों की संख्या प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी, सभी में कम हैं।
2019-2020 में कराए गए नामांकन
लड़के लड़कियां
प्राइमरी - 61230 50323
अपर प्राइमरी - 54219 43726
सेकेंडरी - 25255 20748
हायर सेकेंडरी - 16541 14328
2018-2019 में कराए गए नामांकन
लड़के लड़कियां
प्राइमरी - 59696 48794
अपर प्राइमरी - 53929 44100
सेकेंडरी - 25390 20635
हायर सेकेंडरी - 15420 12610
नामांकन के बाद विद्यार्थियों को रोककर रखना चुनौती
शिक्षा विभाग बच्चों को स्कूल तक लाकर नामांकन तो करा देता है, लेकिन कुछ समय बाद तमाम विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ देते हैं। विद्यार्थियों को रोककर रखना चुनौती है। हालांकि वर्ष 2019-20 में इसके पहले के वर्ष के मुकाबले 5786 विद्यार्थियों के नामांकन अधिक हुए, लेकिन विद्यार्थियों का स्कूल छोड़ना जारी रहा। वर्ष 2019-20 में कुल 286370 और वर्ष 2018-19 में 280574 नामांकन हुए थे।
स्कूल छोड़ने के कारण
1. पांचवीं कक्षा के बाद स्कूलों का घर के आसपास नहीं होना
2. आठवीं के बाद दूसरे स्कूल में दाखिले के लिए माइग्रेशन में दिक्कत
3. गरीब तबके में माता-पिता का बच्चों को अपने साथ काम पर ले जाना
4. लड़कियों को पांचवीं कराने के बाद छोटे भाई-बहन की देखभाल में लगा देना
5. दुकानदार और कारोबारी वर्ग 10वीं के बार बच्चों को कारोबार में लगा देते हैं
इससे बचने के उपाय
1. पांचवीं और छठीं कक्षा करने के बाद विद्यार्थियों की काउंसिलिंग जरूरी
2. स्कूल छोड़ने पर उसके कारण को जानकार दूर करने की दिशा में हो काम
3. हाईस्कूल नजदीक होना चाहिए, जिससे आसानी से नौवीं और 10वी की जाए
काउंसलिंग से हो सकता है समस्या का निवारण
स्कूल छोड़ने पर शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों और उनके परिवार से संपर्क करना चाहिए। काउंसलिंग में उनकी समस्या जानने के बाद निवारण करने पर ही विद्यार्थियों को स्कूल में रोक पाने में कामयाबी मिलेगी। बच्चों के काम पर लगाने वाले माता-पिता की भी काउंसलिंग जरूरी है। - सुधा झा, मुख्य सलाहकार, बाल अधिकार सुरक्षा समिति
स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। शिक्षा विभाग इसके गंभीरता से लेता है। अभिभावकों को समझाया जाता है। इस दिशा में गंभीरता के साथ काम किया जा रहा है।
- रमेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी