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इंसान का व्यवहार ही उसकी पहचान : निशचिंत सागर

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स्थानीय दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में दिए प्रवचन
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। स्थानीय दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन मोहल्ला में शनिवार को मुनि श्री 108 निशचिंत सागर महाराज ने आशीष वचन दिए और उनमें जीवन जीने के चार अनमोल स्रोत बताए। उन्होंने कहा कि इंसान का व्यवहार ही उसकी पहचान होता है।
महाराज ने कहा कि मनुष्य को संगति, वाणी, विवेक और व्यवहार को हमेशा उच्च रखना चाहिए। आपकी जैसी संगति होगी वैसे ही आपके विचार होंगे और जैसे विचार होंगे वैसे ही आपकी वाणी होगी और वैसा ही आपका व्यवहार होगा। अगर आपकी संगति अच्छी होगी तो आपके विचार भी अच्छे होंगे और जो आपको ऊंचाई की तरफ ले जाएंगे। वहीं यदि आपकी संगति बुरी होगी तो आपके विचार भी बुरे होंगे जो आपको गलत राह पर ले जाएंगे। जब इंसान के उच्च विचार होते हैं तो वह मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होता है उसके विचार ही उसके मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं।
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हमें सदैव प्रिय वचन बोलने चाहिए व्यक्ति का समाज में व्यवहार सौहार्दपूर्ण होना चाहिए। हर इंसान को सब के सुख-दुख में भागीदारी होना चाहिए। इंसान का व्यवहार ही उसकी पहचान है अगर हम सभी से अपना व्यवहार अच्छा रखते हैं तो यह हमारे कर्मों की निर्जरा का कारण बनता है। हमें कभी किसी को भी कटु शब्द नहीं बोलने चाहिए किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहिए। यदि आप मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होना चाहते हो, भगवान के चरणों में जाना चाहते हो तो यह याद रखो कि आपका व्यवहार, विचार वाणी व आपकी संगति सदैव अच्छी होनी चाहिए।इस अवसर पर कुलदीप जैन, सुरेश जैन, सुशील जैन, नरेश जैन, विजय जैन, गोरा जैन और विनोद जैन उपस्थित रहे।
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