पानीपत। 12-14 आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। बुधवार को 30 स्वास्थ्य केंद्रों पर महज 131 किशोर बच्चों को कोरोना रोधी टीके की पहली डोज लगी है। मंगलवार को महज 232 बच्चों को टीका लगा था। विभाग पिछले छह दिन में महज 3659 बच्चों को ही टीका लगा पाया है। 16 मार्च से अब तक विभाग 142,86 बच्चों को ही टीके की पहली डोज दे पाया है। ये कुल 60 हजार पात्रों को महज 23 प्रतिशत है।
बापौली, इसराना, मतलौडा खंड में महज 5 प्रतिशत पात्रों को ही टीका लगा है। टीकाकरण की धीमी रफ्तार का कारण स्कूलों में बच्चों की हाजिरी कम होना है। अभिभावक बच्चों को टीकाकरण केंद्रों तक नहीं ले जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार शिक्षा विभाग से कार्यक्रम में तेजी लाने की गुहार लगा रहा है।
एक अप्रैल के बाद स्कूलों में कैंप होंगे शुरू
जिले के लगभग सभी निजी स्कूलों ने कक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। एक अप्रैल से अगला सेशन शुरू हो रहा है। विभाग एक अप्रैल के बाद सरकारी व निजी स्कूलों में कैंप लगाने की प्लानिंग पर काम कर रहा है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अभिभावकों के लिए बैठक बुलाने को कहा है ताकि अभिभावकों को टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जा सके। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि अभिभावक ही बच्चों को केंद्र तक लेकर आए। अभिभावक बच्चों के टीकाकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं।
अब जिला कोरोना मुक्त -
फिलहाल जिले में कोरोना का कोई एक्टिव केस नहीं है। पिछले छह दिन से जिला कोरोना मुक्त है। बुधवार को सिविल अस्पताल में 253 लोगों ने अपनी कोविड जांच कराई है। जिले में अब तक कुल 35 हजार 60 कोरोना केस में 2350 रोगी 12-14 आयु वर्ग के मिले हैं। कोरोना रोकने के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। यह तीसरी लहर में साबित हो चुका है। पानीपत में तीसरी लहर में सिर्फ 4200 मरीज मिले वहीं, सिर्फ 21 मौतें हुई। पहली लहर में 108,58 केस और 164 मौत हुई। दूसरी लहर में 20 हजार से ज्यादा केस व करीब 450 मौतें हुई।
पिछले छह दिन का टीकाकरण
तारीख टीकाकरण
25 मार्च 1422
26 मार्च 1009
27 मार्च 184
28 मार्च 681
29 मार्च 232
30 मार्च 131
स्कूल खुलने के बाद टीकाकरण में आएगी तेजी
स्कूलों में फिलहाल बच्चे कम आ रहे हैं। हम सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर भी कैंप लगा रहे हैं। अभिभावकों से अपील है कि वो अपने 12-14 आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं। बच्चों को टीके के लिए खाली पेट न लेकर आएं। स्कूल खुलने के बाद कार्यक्रम में तेजी आने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग से भी सहयोग मांगा जा रहा है।
डॉ. शशि गर्ग, डिप्टी सिविल सर्जन