-सनौली रोड पर ही हैं सबसे बड़े मावा भंडार
-खाद्य सुरक्षा विभाग ने शनिवार को छुट्टी के दिन ही सैंपल भरने शुरू किए
-अधिकारियों ने डिब्बों का वजन करने की हिदायत दी
फोटो-19 से 23
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। फेस्टिवल सीजन शुरू होते ही यूपी से तैयार मावा व पनीर की खपत दो गुना बढ़ गई है। ऐसे में मांग को पूरा करने के लिए मावा व पनीर में मिलावट के साथ सूखे दूध में वनस्पति घी मिलाकर मावा बनाने की संभावना बढ़ गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस बार सीजन शुरू होते ही मावा व मिष्ठान भंडारों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने अपनी टीम के साथ शहर के मावा व मिष्ठान भंडारों से खोया व पनीर समेत दस खाद्य सामग्रियों के सैंपल लिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के सैंपल लेने से दुकानदारों व व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति बनी रही।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. श्यामलाल के नेतृत्व में टीम ने फेस्टिवल सीजन को देखते हुए शनिवार को ही सैंपल लेने शुरू कर दिए। डॉ. श्यामलाल टीम के साथ शनिवार सुबह सबसे पहले सनौली रोड स्थित शिव मावा भंडार पर पहुंचे। उन्होंने यहां से खोया व पनीर का एक-एक सैंपल भरा। वे इसके बाद लक्ष्मी मावा भंडार पर पहुंचे। यहां पर भसी खोया व पनीर का सैंपल भरा। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी के सैंपल लेने की सूचना पर सनौली रोड के मावा व मिष्ठान भंडार संचालक सतर्क हो गए। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी इस रोड को छोड़कर सीधे रेलवे रोड पर पहुंचे। यहां पर लक्ष्मी बीकानेर मिष्ठान भंडार से रसगुल्ला व गुलाब जामुन का एक-एक सैंपल भरा। वे यहां से सीधे मॉडल टाउन पहुंचे। यहां पर रसगुल्ला व दाल मखनी का एक-एक सैंपल भरा। मॉडल टाउन स्थित मिट्ठन स्वीट्स सऐ कलाकंद व पनीर का एक-एक सैंपल भरा।
खोया व पनीर के सैंपल में आते हैं सही फैक्टस
खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार खोया व पनीर की मिठाई बनने के बाद उसके सारे फैक्ट्स पकड़े नहीं जा सकते। ऐसे में उसको पहले ही चैक करना जरूरी है। खोया व पनीर बनाते ही सैंपल भरकर जांच कराने से फैक्ट्स स्पष्ट हो जाते हैं।
सूखे दूध में वनस्पति व दूसरे घी मिलकर खोया व पनीर गलत
त्योहारी सीजन में दूध की कमी होने पर लोग सूखे दूध से खोया व पनीर बनाते हैं। सूखे दूध में देसी घी मिलाकर खोया व पनीर बनाया जा सकता है, लेकिन कुछ लोग अपनी बचत के लिए सूखे दूध में वनस्पति व दूसरे घी मिलाकर खोया व पनीर तैयार करते हैं। यह सब स्वास्थ्य के खिलाफ जाता है।
सैंपल फेल होने पर सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार सैंपल लेकर करनाल लैब में जांच को भेजा जाता है। इसकी रिपोर्ट एक से दो सप्ताह में मिल जाती है। खोया या पनीर में फैट कम आने पर एडीसी की कोर्ट में केस डाला जाताहै। एडीसी की कोर्ट आरोपी दुकानदार को पांच लाख तक का जुर्माना कर सकती है। खोया व पनीर में मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या फिर जानलेवा पाया जाता है तो यह ज्यूडिसरी के अंतर्गत जाता है। इसमें कम से कम छह माह और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। कोर्ट इसके साथ दोषी को आर्थिक दंड भी लगा सकती है।
मिठाई के रेट में तोल रहे डिब्बा
जिले के कई दुकानदार फेस्टिवल सीजन में मिठाई के रेट में डिब्बा भी बेच रहे हैं। ये लोग ग्राहक के मांगने पर रेट बढ़ाने की बात करते हैं। ऐसे में कई बार विवाद भी हो जाता है। इसकी जांच माप-तौल निरीक्षक को करनी होती है और यह खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के साथ अटैच होता है। बताया जा रहा है कि कुछ दुकानदारों ने फेस्टिवल सीजन में वजनी डिब्बे स्पेशल तौर पर बनवा लिए हैं। ये ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा प्रयोग किए जाते हैं। कई दुकानदार ढाई सौ ग्राम के डिब्बे में सौ या डेढ़ सौ ग्राम ही ज्यादा मिठाई देते हैं। वे सौ या सवा सौ ग्राम डिब्बे का वजन मिठाई में ही तोल देते हैं।
वर्जन
त्योहारी सीजन में मिठाइयों के साथ खोया व पनीर में मिलावट के चांस बढ़ जाते हैं। इनको मिठाई बनने से पहले ही पकडना आसान होता है। विभाग द्वारा अब नियमित तौर पर सैंपल लेने का काम नियमित रूप से किया जाएगा। किसी तरह की मिलावट मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. श्यामलाल, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी पानीपत।
--जगमहेंद्र--