पानीपत। जिनवाणी विद्या भारती स्कूल में 11 दिवसीय श्री 1008 कल्पद्रुम समव शरण महामंडल विधान का रविवार को चौथा दिन रहा। जैन संत समर्पण सागर महाराज के सानिध्य में धूमधाम से कार्यक्रम किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के साथ किया। इसका सौभाग्य चारों चक्रवर्ती और जैन मंदिरों में नियमित रूप से अभिषेक करने वाले इंद्र गणों को प्राप्त हुआ। सागर महाराज ने बताया कि समव शरण के अंदर जिनेंद्र भगवान को 64 चंवर ढुराएं जाते हैं, जो कि भगवान के 64 रिद्धि के स्वामी होने का प्रतीक है। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित इंद्र-इंद्राणीगण और बच्चों द्वारा संगीत की स्वर लहरियों के मध्य भगवान को 64 चंवर ढुराए गए।
जैन समाज ने भारत की आजादी के लिए अनेक कुर्बानियां दी है तथा नवभारत के निर्माण में अहम योगदान रहा है। जिनेंद्र भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति भी सर्वोपरि है। धर्म और राष्ट्र में सदैव राष्ट्र को आगे रखा गया है। पूजन प्रारंभ होने से पहले राष्ट्रगान द्वारा मंगलमय आगाज किया गया था। सैकड़ों राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के हाथों में लेकर देशभक्ति के नगमे पर भक्त लोग ने खूब भक्ति की और विशेष रूप से विधान के दौरान जिन वाणी विद्या भारती सी सै स्कूल के छात्रों ने महा मंत्रणमोकार पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों द्वारा लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें दर्शाया गया कि भगवान महावीर स्वामी के समव शरण के दौरान एक मेंढक अपनी भक्ति में तल्लीन भगवान की समव शरण में जाते वक्त राजा के हाथी के पैर के नीचे आकर मृत्यु को प्राप्त हुआ और वह भगवान के समव शरण में जाकर देव के रूप स्थापित हुआ। यह भक्ति का ही प्रसाद है। विधान पूजन में चार पूजा संपन्न कराई गई। जिसमें 250 अर्घ जिनेंद्र प्रभु को समर्पित किए गए। 11 दिवसीय विधान में 2400 से भी अधिक समर्पित किए जाएंगे। दिल्ली और शामली से आए अतिथियों का स्वागत दिगंबर जैन पंचायत द्वारा किया गया। गुरुदेव ने कहा कि कल सोमवार को छत्र जिनेंद्र भगवान पर लगाए जाएंगे। संध्या के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।