अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। बस स्टैंड पानीपत की ट्रैफिक ब्रांच में 90.70 लाख रुपये के गबन के मामले में दो दिन से चल रही जांच तीसरे दिन शनिवार सुबह 11:30 बजे खत्म हो गई। इसमें स्पेशल ऑडिट टीम को विभाग के पैसों में कोई भी गबन नहीं मिला। इसके बाद टीम सारा रिकॉर्ड लेकर पंचकूला लौट गई और विभाग के निदेशक को जांच की जानकारी दी।
बता दें कि पानीपत बस स्टैंड के ट्रैफिक ब्रांच के खिलाफ सीएम विंडो और परिवहन विभाग से 90.70 लाख रुपये के गबन की शिकायत की गई थी। सीएम विंडो में दी शिकायत में आरोप लगाए थे कि 2013 से 2015 के बीच अकाउंट ब्रांच से बसों का टोल टैक्स जमा नहीं करवाया गया। बस चालक नकदी की पर्ची कटवाते रहे है। इसकी जांच की जानी चाहिए। डिपो में 2016 में लेखा अधिकारी द्वारा लगाए तीन एडवांस ड्राल रजिस्ट्रर की जांच करने, हरिद्वार में लगने वाले मेलों के दौरान स्पेशल परमिट बनवाने के लिए निकलवाए एडवांस की जांच, सफाई ठेका 25 कर्मचारियों का दिखाकर पांच कर्मचारी लगाने की जांच करने की मांग की गई थी। इसके बाद विभाग के निदेशक ने स्पेशल ऑडिट टीम गठित कर गबन की जांच शुरु कराई। टीम में स्टेट ट्रांसपोर्ट हरियाणा के चीफ अकाउंट ऑफिसर विजय सिंगला, सीनियर अकाउंट ऑफिसर रक्षा सुनेजा, अकाउंट ऑफिसर सिरसा अश्वनी मदान, सेंट्रल वर्कशॉप हरियाणा के आरएसओ गुरप्रीत सिंह और रोडवेज सब इंस्पेक्टर अंबाला से निर्भय सिंह जांच में शामिल किया गया। टीम ने पानीपत बस स्टैंड की ट्रैफिक और अकाउंट ब्रांच के साथ आसपास के टोल प्लाजा का रिकॉर्ड तीन दिन तक खंगाला। इसमें टीम को कोई गबन होने के दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद अकाउंट और ट्रैफिक ब्रांच को क्लीन चिट दे गई है।
पंचकूला से आई स्पेशल टीम की तीसरे दिन जांच पूरी हो गई है। जांच में टीम को सब कुछ ठीक मिला है। इसमें पानीपत की अकाउंट ब्रांच और ट्रैफिक ब्रांचों को क्लीन चिट दे दी गई है। 90.70 लाख रुपये की गबन की शिकायत झूठी पाई गई है। टीम अब जांच की रिपोर्ट परिवहन विभाग के निदेशक को सौंपेगी।
अश्वनी कुमार ढोगरा, जीएम, रोडवेज पानीपत।