पानीपत। डॉक्टरों की मानें तो पानीपत में 16 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 60 प्रतिशत युवा धूम्रपान के आदी हैं। 32-35 आयु वर्ग तक पहुंचने पर कैंसर का शिकार हो रहे हैं। यह गंभीर स्थिति है, जिससे त्चरित तौर पर निपटने की जरूरत है।
मंगलवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। इसका मकसद लोगों को तंबाकू सेवन के खतरों से बचाना है। इस दिशा में पानीपत सिविल अस्पताल में तंबाकू से छुटकारे के लिए अलग से ओपीडी शुरू की गई है, जहां तंबाकू की गिरफ्त में आए लोगों की काउंसिलिंग की जाती है।
जिले में पिछले पांच वर्ष के दौरान कैंसर के 610 केस सामने आए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत रोगी बीड़ी, सिगरेट या अन्य तंबाकू पदार्थों का सेवन करने वाले पाए गए हैं। इनमें से 40 प्रतिशत मरीजों की मौत हो चुकी है। यह स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा है। हालांकि इससे निजी अस्पताल इत्तेफाक नहीं रखते। उनके अनुसार जिले में कैंसर के पांच हजार से अधिक रोगी हैं। उनमें भी सबसे ज्यादा मुंह के कैंसर रोगी हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का सेवन है।
वर्ष 2021 में जिले में कैंसर के 139 नए केस मिले। 2020 में कैंसर के 71 नए रोगी सामने आए थे। पानीपत में 2017 से 2019 तक कैंसर के 400 मरीज सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्योग नगरी पानीपत में दूसरे प्रदेशों के लोगों की संख्या अधिक है। प्रवासी गुटखा खाने के आदी होते हैं, जो मुंह के कैंसर से ग्रस्त मिलते हैं।
डॉ. प्रेम कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिनव ने बताया कि पानीपत में कैंसर बढ़ने का बड़ा कारण तंबाकू का सेवन व शहर का बढ़ता प्रदूषण है। उनके यहां अस्पताल में हर माह करीब 50 सर्जरी हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर बड़ी परेशानी बन रही है। वह अब तक करीब एक हजार रेडियोथैरेपी कर चुके हैं। जो भी कैंसर के नए रोगी मिलते हैं, उनमें से 90 प्रतिशत धूम्रपान के आदी पाए जाते हैं। इसलिए कैंसर से बचना है तो बीड़ी, सिगरेट और गुटखा छोड़ना होगा।