पानीपत। जिले में वीरवार को अचानक हुई तेज बारिश से मंडियों में खुले में पड़ा 5,589.6 मीट्रिक टन धान भीग गया। इसके अलावा खेतों में पक कर तैयार खड़ी फसल और कटाई के बाद खुले में छोड़े गए धान को भी काफी नुकसान पहुंचा है। वीरवार को सुबह से शुरू बारिश देर शाम तक होती रही। जिले में औसतन 11.4 एमएम बारिश हुई। पानीपत खंड में सबसे अधिक 21 एमएम बारिश हुई। बारिश से इंसार बाजार और इसके साथ लगते बाजारों में पानी जमा होने पर त्योहारी सीजन में खरीदारी को आए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिले में वीरवार सुबह करीब सात बजे हल्की बूंदाबांदी से शुरू हुई। आठ बजे तेज बारिश शुरू होने के बाद मंडियों में पानी भर गया। वहीं मुख्य मार्गों और बाजारों में जलभराव से लोगों को काफी परेशानी हुई। शहर के व्यस्ततम इंसार बाजार और गुरुद्वारा मार्केट में खरीदारी करने पहुंचे नागरिकों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जीटी रोड पर भी पानी भरने से वाहनों की गति धीमी पड़ गई।
यहां इतनी बारिश दर्ज
खंड बारिश (एमएम)
पानीपत 21
समालखा 09
इसराना 10
बापौली 10
मतलौडा 07
मंडियों में धान की स्थिति
जिले की छह अनाज मंडियों में धान की आवक और खरीद चल रही है। अब तक 1,91,127.9 मीट्रिक टन धान आया है। इसमें से 1,85,538.3 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। सबसे अधिक 1509 किस्म की 1,53,362.0 मीट्रिक टन आवक हुइ है। इसके अलावा समालखा मंडी में सबसे अधिक 1,03,742, पानीपत में 32,152.5, मतलौडा में 22,125, इसराना में 14,096, बाबरपुर में 11,337.2, और बापौली में 7,675.2 मीट्रिक टन धान आया है। निजी मिलर्स और डीलरों ने 1,70,452 मीट्रिक टन, हैफेड ने 4,669 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी ने 10,374.3 मीट्रिक धान खरीद किया है। मंडियों में स करीब 5,589.6 मीट्रिक टन धान बिक्री के लिए शेष बचा हुआ है।
बारिश में धान भीगने पर बोले किसान
सिवाह गांव के किसान राजबीर सिंह ने बताया कि वे वीरवार सुबह ही अपनी दो एकड़ धान की कटी फसल को बचाने के लिए खेत में पहुंचे थे, लेकिन तेज बारिश ने सब कुछ भिगो दिया। मंडियों में उठान न होने के कारण हमारा धान खुले में भीग गया है। इससे अब बोली में भाव कम मिलने और फसल खराब होने की चिंता सता रही है।
इसराना के किसान सुरेश कुमार ने बताया कि प्रशासन के लाख दावों के बावजूद मंडियों से समय पर धान का उठान नहीं हो रहा है। अगर समय पर तिरपाल या शेड के नीचे व्यवस्था होती, तो आज यह स्थिति न बनती। भीगा हुआ धान खरीदने में आढ़ती और मिलर्स आनाकानी करते हैं।
सनौली के किसान महेंद्र त्यागी ने बताया कि एक तरफ खेतों में फसल बर्बाद हो रही है, तो दूसरी तरफ मंडी में बेचने गए तो वहां जलभराव के बीच बैठना पड़ रहा है। इस बेमौसमी मार ने दिवाली की खुशियों पर पानी फेर दिया है। मतलौडा के किसान बलवान सिंह ने बताया कि खेतों में अभी कुछ फसल कटने से रह गई है। बारिश के कारण खेत पूरी तरह से गीले हो गए हैं।
कृषि विशेषज्ञ और मौसम सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र उझा के जिला समन्वयक डॉ. सतपाल ने बताया कि आगामी दिनों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसलिए किसान भाई मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए ही धान की कटाई करें। किसानों का धान कट चुका है तो वे उसे सुरक्षित स्थानों या तिरपाल के नीचे ढककर रखें। कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. देवेंद्र कुहाड़ ने बताया कि धान की कटाई कर छोड़ी फसल को नुकसान हो सकता है। किसानों को चाहिए कि अब नई कटाई न करें। वे मौसम साफ होने का इंतजार रखें।
वर्जन :
मंडियों में धान की आवक के साथ खरीद की जा रही है। धान ढकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था कराई गई है। किसानों से अपील है कि धान को सूखा कर लाएं।
डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त।
बारिश में जीटी रोड से गुजरते वाहन। संवाद- फोटो : samvad
बारिश में जीटी रोड से गुजरते वाहन। संवाद- फोटो : samvad