माई सिटी रिपोर्टरपानीपत। टीडीआई सिटी (सेक्टर-38-39) में लाइसेंस की अवधि समाप्त होने और रजिस्ट्रियों पर रोक के बावजूद 522 हस्तांतरण विलेख (कन्वेयंस डीड) निष्पादित किए जाने का मामला सामने आया है। अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) की जांच रिपोर्ट में बिल्डर की ओर से दूसरे की जमीन को लेआउट प्लान में दर्शाने और धार्मिक साइट का हस्तांतरण करने समेत कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
अनियमितताओं, रजिस्ट्रियों और लेआउट प्लान से जुड़े मामले की जांच एडीसी की ओर से की गई। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) की पड़ताल और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि टीडीआई के मुख्य लाइसेंस की वैधता 10 फरवरी 2018 को समाप्त हो चुकी थी।
डीटीसीपी की ओर से अक्तूबर 2023 और नवंबर 2025 में तीसरे पक्ष के अधिकारों यानी रजिस्ट्रियों पर रोक के आदेश जारी किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इसके बावजूद वर्ष 2023 से 8 सितंबर 2026 के बीच 522 हस्तांतरण विलेख (कन्वेयंस डीड) निष्पादित किए गए। यह एक कानूनी दस्तावेज है जिसका उपयोग किसी संपत्ति का स्वामित्व एक व्यक्ति या पक्ष से दूसरे व्यक्ति या पक्ष को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
दूसरे की जमीन को लेआउट में दिखाने का भी उल्लेख
जांच रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डर ने 19 दिसंबर 2003 की सरकारी नीति के प्रावधानों का पालन किए बिना जिला स्तरीय कमेटी की मंजूरी के बगैर डी-ब्लॉक स्थित 968 वर्ग गज की धार्मिक साइट को 3 मई 2019 को गिफ्ट डीड के माध्यम से वैदिक धर्म संस्थान को हस्तांतरित किया। इसके अलावा स्वीकृत लेआउट में दर्शाई गई दूसरी धार्मिक साइट और नर्सरी स्कूल की जमीन टीडीआई के स्वामित्व में नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन जमीनों को लेआउट प्लान में दर्शाकर लाइसेंस स्वीकृत कराया गया।
एसटीपी नहीं लगाने पर लगाया था 5.47 करोड़ का जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नहीं लगाने और गंदा पानी बहाने के मामले में बिल्डर पर 5.47 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 4720 केएलडी क्षमता का एसटीपी नहीं लगाने और गंदा पानी बहाने के मामले में एनजीटी ने 27 अप्रैल 2024 को बिल्डर पर 5.47 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। टीडीआई के निवासियों ने बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, अवैध गिफ्ट डीड रद्द करने और प्रोजेक्ट को सरकार के अधीन लेने की मांग की है।
शिकायत के आधार पर डीटीपी और संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। जांच में धार्मिक साइट के हस्तांतरण और प्रतिबंध के बावजूद 522 रजिस्ट्रियां निष्पादित किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा बिल्डर बुनियादी सुविधाएं, कम्युनिटी सेंटर, सब-पोस्ट ऑफिस और एसटीपी का निर्माण नहीं कर पाया है। टीडीआई प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। पूरे तथ्यों के साथ जांच रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए उपायुक्त को सौंप दी गई है। -अंकित चौकसे, एडीसी