नई सरकार ने रेल बजट आने से पहले ही यात्री किराया व माल भाड़ा बढ़ाकर यात्रियों व उद्यमियों पर बोझ डाल दिया। घोषणा के अनुसार बढ़ी दरें 25 जून से लागू होंगी।
किराये में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद यात्रियों व उद्यमियों ने भारी रोष है। यात्रियों का कहना है कि अब उन्हें कही आने जाने से पहले सौ बार सोचना होगा।
वहीं उद्यमी कह रहे हैं माल ढुलाई महंगी होने से उन पर बोझ बढ़ेगा। साथ ही अधिकतर लोगों की निगाहें नौ जुलाई को पेश होने वाले रेल बजट पर भी टिक गई हैं।
रेलगाड़ियों में हर वर्ग यात्रा करता है लेकिन गरीब तबके की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है। ऐसे में किराया बढ़ने से यात्रा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ-साथ माल भाड़ा बढ़ने के साथ ही अधिकतर उत्पाद के दामों में भी भारी बढ़ोतरी होगी।
अब यह होगा किराया
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्री गाड़ियों का किराया 15 किलोमीटर की स्लैब बनाकर बढ़ाया है। घोषणा के अनुसार 15 किलोमीटर से अधिका दूर वाले रेलवे स्टेशन पर तक पांच रुपये बढ़ोतरी होगी।
अर्थात 0 से 15 किलोमीटर वाले रेलवे स्टेशन का किराया पहले वाला ही रहेगा। 15 से 30 किलोमीटर तक यात्री को 10 रुपये की जगह अब 15 रुपये किराया देना होगा। जहां पहले 15 रुपये लगते थे वहीं अब 25 किराया हो जाएगा।
उद्योगपतियों ने कहा, रोजमर्रा की चीजे 30 से 40 प्रतिशत महंगी होंगी
काकू बंसल, उद्योगपति ने बताया कि पानीपत में हर साल 4500 करोड़ के टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात तथा 15 हजार करोड़ का माल घरेलू बाजार में जाता है।
इसमें से काफी माल ट्रक तथा बाकी ट्रेन से भेजा जाता है।। यहां से विशेष रूप से सामान बंदरगाहों से आता व जाता है। इस तरह से मालभाड़ा बढ़ने से उत्पादों के दामों में भारी बढ़ोतरी होगी।
सुरेश मित्तल, उद्योगपति बताया कि माल भाड़ा में बढ़ोतरी का होना एक तरह से महंगाई को और भी ज्यादा बढ़ावा देना है। इसका सीधा असर विभिन्न उत्पादों पर पड़ेगा।
बिजली, कपड़ा व खाद्य सामग्री बहुत ज्यादा महंगी होगी। सुरेंद्र बिंदल, उद्योगपति बताया कि महंगाई का सीधा असर उपभोक्ता पर पड़ता है। कोई भी उद्योगपति अपने आप को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। माल भाड़ा बढ़ने के साथ ही रोजमर्रा की चीजों के दामों में भी 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो जाएगी।
चंदन विज, उद्योगपति ने बताया कि माल भाड़ा बढ़ने से उद्योगपतियों को भी आर्थिक नुकसान होता है। कोई भी चीज उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते महंगी हो जाएगी। इससे उपभोक्ता खरीददारी कम करेंगे। खरीदारी कम होगी तो साधारण बात है उद्योगपतियों को नुकसान तो होगा ही।
अजय माइकल, पीआरओ, उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल ने बताया कि यह सब फैसले मंत्रालय को लेने होते हैं। इस तरह से किराया व माल भाड़ा में बढ़ोतरी होना बड़े स्तर की बात होती है। हमारी पूरे प्रयास हैं कि पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराएं।