सफाई कंपनी के एजीएम पर भड़के पार्षद, बीच बचाव करने पर निगमायुक्त से उलझा एजीएम
मौके पर बुलाई पुलिस, मुख्यमंत्री के ओसएडी का फोन आने के बाद माफ किया निगमायुक्त ने
जिस शहर की सफाई पर 48 लाख रुपये होते थे खर्च उसकी एक करोड़ में भी नहीं हो पा रही है सफाई, इसी बात पर बढ़ा था विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिस शहर की सफाई का बिल हर माह 48 लाख रुपये होती थी। उसी का भुगतान अब हर माह एक करोड़ रुपया दिया जाता है। इसके बाद भी सफाई नहीं है। इस बात के कहने पर जेबीएम कंपनी का एजीएम भड़क गया। इसके बाद निगमायुक्त ने बीच बचाव किया तो एजीएम ने निगमायुक्त के साथ तेज आवाज में बात की। मामला इतना गंभीर हो गया कि निगमायुक्त को मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी।
पार्षद सुरेंद्र गर्ग, अशोक कटारिया, राम रतन अग्रवाल, लोकेश नागरु व संयुक्त आयुक्त सुमन भकड़ के साथ शहर का कूड़ा उठाने वाली कंपनी जेबीएम के एजीएम विपुल शर्मा व एक अन्य सफाई कंपनी के अधिकारी के बीच बातचीत चल रही थी। समय लगभग चार बजे का था। निगमायुक्त प्रदीप डागर ने सफाई कंपनी के अधिकारियों को बुला रखा था। बातचीत के बाद समस्या का हल तलाशा जा रहा था।
पार्षदों का कहना था कि यही शहर है जिसके लिए 48 लाख रुपये का भुगतान किया जाता था और अब उसी काम पर निगम एक करोड़ रुपया खर्च कर रहा है। समस्या घटने के बजाय बढ़ गई है। इस बात पर कंपनी का एजीएम विपुल शर्मा भड़क गया । वह तत्कालीन पार्षदों से बहस करने लगा। उसका कहना था कि उसका भुगतान नहीं हो रहा है। जिस पर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त ने बीच बचाव किया। बताते हैं कि वह निगमायुक्त से भी तेज आवाज में बात करने लगा और उनकी तरफ हाथ उठा कर बात करने लगा। जिस बात पर निगमायुक्त को गुस्सा आ गया है। उन्होंने कहा कि जिस काम के लिए तुम्हें पैसा दिया जाता है वह काम तो हो नहीं रहा है। पार्षद, डीसी, मंत्री, जनता सफाई को लेकर उनके कपड़े फाड़ रहे हैं। हर जगह निगम को जलील होना पड़ रहा है।
इसी दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारी से मोबाइल पर बात की और पुलिस भेजने को कहा। कुछ ही देर में सिटी थाना पुलिस भी नगर निगम कार्यालय में पहुंच गई। इसी बीच एजीएम के साथ आए दूसरे अधिकारी ने उनकी ओर से माफी मांगते हुए कहा कि पानीपत में किसी अन्य को तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही उसकी सिफारिश में मुख्यमंत्री के एक ओएसडी का भी फोन आया। अंत निगमायुक्त ने काम में सुधार लाने की बात कह कर उसे माफ किया।