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धनतेरस पर शहर में कारोबार 50 करोड़ के पार, वाहनों, आभूषणों और बर्तनों की खरीद को लेकर उत्साह

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फोटो संख्या- 6 व 7
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धनतेरस पर शहर में कारोबार 50 करोड़ के पार, वाहनों, आभूषणों और बर्तनों की खरीद को लेकर उत्साह
- सोमवार को मनाया जाएगा धनतेरस पर्व, जगमगाया शहर का बाजार
पानीपत। धनतेरस के लिए शहर का बाजार सज कर पूरी तरह तैयार है। धनतेरस के साथ ही महापर्व दीपावली की शुरूआत हो जाती है। इसके बाद छोटी दीपावली या नरक चौदस, फिर बड़ी या मुख्य दीपावली व गोवर्धन पूजा और अंत में भाई दूज या भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक धनतेरस का पर्व हर साल दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल अक्तूबर या नवंबर महीने में आता है। इस बार धनतेरस 5 नवंबर सोमवार को है।
शहर के प्रमुख कारोबारियों की मानें तो धनतेरस व दीवाली को लेकर इस बार शहर में 60 करोड़ से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बाजारों में जाम की समस्या व भारी भीड़ के कारण कुछ व्यवसायी बाजारों में घूसने से परहेज कर रहे हैं। यदि पुलिस प्रशासन भारी वाहनों के बाजारों में प्रवेश पर रोक लगाती और उपभोक्ताओं को पुलिस प्रशासन की सुविधा मिलती तो यह कारोबार 80 करोड़ के पार जा सकता था।
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धनतेरस को लेकर सर्राफा बाजार का कारोबार 10 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है। बर्तनों की दुकानों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए 3 करोड़ के करीब कारोबार हो सकता है। ऑटोमोबाइल कारोबार 12 करोड़ के पार जा सकता है। व्यवसासियों के अनुसार शहर में कुल कारोबर 60 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है। संयुक्त व्यापार मंडल के प्रधान अनिल मदान ने कहा कि व्यवसायियों ने अपने प्रतिष्ठानों को बिजली की रंग बिरंगी झालरों और ताजे और रंग-बिरंगे फूलों की लडिय़ों से आकर्षक ढंग से सजाया है। धनतेरस से दो दिन पहले की शाम भी सतरंगी रोशनी से नहाई नजर आई। महीने के शुरूआत में धनतेरस और दीवाली होने के बावजूद लोगों के उत्साह को देखते हुए भी व्यापारियों को अच्छा व्यवसाय होने की उम्मीद है। धनतेरस के मौके पर धातुओं के बर्तन और आभूषण खरीदने की प्राचीन परंपरा रही है। लोग धनतेरस के दिन बर्तनों ओर आभूषणों के अलावा इस दिन वाहन खरीदना शुभ मानते हैं। इस बार ऑटो बाजार के चमकने की भी उम्मीद है। जिस तरह लोगों ने दोपहिया, चौपहिया वाहनों की बुकिंग कराई है, उससे लगता है कि इस बार ऑटो व्यवसाय पर लक्ष्मी मेहरबान हैं। ऑटो प्रतिष्ठानों और कंपनियों ने धनतेरस और दिवाली के दौरान खरीद पर आकर्षक ईनामी योजनाओं की घोषणाएं की हैं।
इस बार ब्रांडेड आभूषणों की बढ़ी मांग
धनतेरस पर सोने चांदी का व्यवसाय भी चमकने की उम्मीद है। इस बार परंपरागत आभूषणों की जगह ब्रांडेड ज्वैलरी की काफी मांग है। महिलाओं ने पहले से ही आभूषण पसंद कर उनकी एडवांस बुकिंग करा दी थी। वे यह आभूषण धनतेरस के दिन घर ले जाने वाली है। सर्राफा बाजार के प्रधान राजेश सूरी ने बताया कि ज्वैलर्स की दुकानों पर इस बार एंटीक ज्वैलरी और सोने चांदी के बर्तनों की अच्छी डिमांड है। शहर में 250 से अधिक दुकानें हैं जिन पर 10 करोड़ से अधिक का कारोबार हो सकता है।
बर्तनों की चमक से जगमगा रहा बाजार
धनतेरस के लिए बाजार में सजी बर्तन की दुकानों की चमक से पूरा बाजार जगमगा रहा है। स्टेनलेस स्टील के बर्तनों के साथ कीमती धातुओं के बर्तनों से दुकानें भरी पड़ी हैं। सोने चांदी और आटो व्यवसाय भले ही चाहे जितना उछाल मारे लेकिन बर्तन बाजार सब पर भारी रहने की उम्मीद है। हर आम और खास व्यक्ति धनतेरस पर कम या ज्यादा बर्तन जरूर खरीदता है। धनतेरस का क्या है महत्व?
खरीददारी पर जाम का रहा प्रभाव, दुकानदार परेशान
उपभोक्ताओं की खरीददारी पर बाजार में लगने वाला जाम भारी पड़ रहा है। इससे न केवल ग्राहक बल्कि दुकानदार भी परेशान हैं। बड़े वाहनों के प्रतिबंध के बावजूद बाजार में वाहनों की एंट्री हो रही है जिससे जाम की स्थिति पैदा होती है। दुकानदारों द्वारा बार-बार मांग करने के बावजूद पुलिस प्रशासन ने बाजार में अभी तक पुलिस कर्मी तैनात नहीं किए हैं जिससे बड़े वाहन बेखौफ बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के चलते कार्तिक मास की त्रयोदशी अति महत्वपूर्ण मानी गई है। ज्योतिषाचार्य प. दाऊ जी महाराज कहना है कि धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी, मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है। धनतेरस का यमराज से संबंधित व्रत है। इसके अलावा इस दिन आयुर्वेद के पुरोधा भगवान धनवन्तरि का पूजन कर स्वास्थ्य की मंगल कामना की जाती है। उन्होंने बताया कि इस दिन सायंकाल घर के दरवाजे पर एक पात्र में अन्न रखकर उसके ऊपर यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में दीप दान करने से मनुष्य की अकाल मृत्यु नहीं होती।
धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 05 नवंबर 2018 को सुबह 01 बजकर 24 मिनट पर।
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 05 नवंबर 2018 को रात 11 बजकर 46 मिनट पर।
धनतेरस पूजा मुहूर्त- 05 नवंबर 2018 को शाम 06 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 17 मिनट तक।
कुल अवधि- 01 घंटे 57 मिनट
प्रदोष काल- 05 नवंबर 2018 को शाम 05 बजकर 42 मिनट से रात 08 बजकर 17 मिनट तक।
वृषभ काल- 05 नवंबर 2018 को शाम 06 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक।
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