एमएलआर और पीएमआर ऑनलाइन करना डाक्टरों के लिए जी का जंजाल बन गया है। राज्य के सभी डॉक्टरों को 31 दिसंबर तक एमएलआर और पीएमआर ऑनलाइन करनी है। डॉक्टर अभी तक मात्र 40 प्रतिशत एमएलआर ही ऑनलाइन कर सके हैं, जबकि पीएमआर को तो डॉक्टरों ने छुआ तक नहीं है।
ऐेसे में अगर डाक्टर विभाग के निर्देशों पर खरा नहीं उतरते हैं तो उन्हें चार्जशीट कर दिया जाएगा। वहीं, डाक्टरों ने अपनी परेशानी का ठिकरा विभाग की असुविधाओं पर फोड़ा है। डाक्टरों का कहना है कि सरकार के द्वारा पूरे अस्पताल में सिर्फ एक ही कंप्यूटर और ऑपरेटर दिया गया है। अब वह मरीजों को देखें या फिर एमएलआर ऑनलाइन करें।
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा डॉक्टरों को एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) और पीएमआर (पोस्टमार्टम रिपोर्ट) को लेकर कड़े निर्देश दिए गए है। उनको 31 दिसंबर तक सब ऑनलाइन करने हैं। जैसे-जैसे 31 दिसंबर नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे डॉक्टर मरीजों को देखना छोड़ एमएलआर और पीएमआर को ऑनलाइन करने में जुट गए हैं।
रात को जाग कर डॉक्टर चार्जशीट से बचने का प्रयास कर रहे हैं। डॉक्टरों ने अपने घरों में भी कंप्यूटर पर इंटरनेट का कनेक्शन लगवा लिया है। डॉक्टरों की इस व्यस्तता का मरीजों को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अधिकतर वक्त डॉक्टर अपने कार्यालय में होने की बजाय ऑपरेटर के दफ्तर में ही देखे जाते हैं।
डॉक्टर बोले मरीज भी देखने और ऑनलाइन भी करने
सिविल अस्पताल की महिला डाक्टर ने बताया कि उनके पास समय काफी कम है। उन्हें पांच दिन के अंदर लगभग आठ माह की एमएलआर ऑनलाइन करनी हैं। वह ड्यूटी टाइम में एक बार आपातकालीन विभाग में मरीजों को देखने के लिए जाती हैं। उसके बाद तुरंत ऑपेरटर के रूम में वापस जाकर एमएआर ऑनलाइन करनी पड़ती हैं।
जिससे वह न तो मरीजों को वक्त दे पाती हैं और न ही एमएलआर अपडेट कर पाती हैं। उन्हें इंटरनेट पर भी अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। घर में एक कंप्यूटर लगाना पड़ा ताकि 31 दिसंबर तक एमएलआर ऑनलाइन कर सकें। वह रातभर जागकर अपने पति के साथ एमएलआर को ऑनलाइन में लगी रहती हैं।
कंप्यूटर एक, आपरेटर एक और डाक्टर 19
सिविल अस्पताल में 19 डाक्टर हैं जिसमें एमएस भी शामिल हैं। लेकिन विभाग के द्वारा सिविल अस्पताल में एमएलआर ऑनलाइन करने के लिए सिर्फ एक कंप्यूटर दिया गया है। सभी डॉक्टरों की एमएलआर को ऑनलाइन करने के लिए सिर्फ एक ही ऑपरेटर मौजूद है। ऑपरेटर बारी-बारी से सभी डॉक्टरों की एमएलआर को अपडेट कर रही हैं। ऑपरेटर रूम में हर वक्त डाक्टरों की भीड़ जमा रहती है।
डॉक्टर के बीच में रोड़ा बन रही साइट
डॉक्टरों ने अपनी परेशानियां बताते हुए कहा कि विभाग के द्वारा एमएलआर ऑनलाइन करने के लिए उन्हें जो साइट दी गई है। वह ज्यादातर वक्त बंद ही रहती है। कई-कई घंटे तक साइट नहीं खुलती। जब साइट खुलती है उनका ड्यूटी टाइम खत्म हो जाता है। वह किस वक्त एमएलआर अपडेट करें।
एमएलआर हुई 40 प्रतिशत पीएमआर को तो छेड़ा ही नहीं
सिविल अस्पताल के डाक्टर ने बताया कि दिन रात लगने के बाद उन्होंने साल भर की 40 प्रतिशत मेडिकल लीगल रिपोर्ट को ऑनलाइन किया है। अभी 31 दिसंबर आने में पांच दिन बचे है। उन्हें 60 प्रतिशत एमएलआर और भी ऑनलाइन करनी है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को तो उन्होंने छुआ तक नहीं है। उनको लगता है कि उनका चार्जशीट होना तो तय है।
ऑपरेटर की छुट्टियां रद
सिविल अस्पताल प्रशासन द्वारा डाटा ऑनलाइन करने को देखते हुए ऑपरेटर की छुट्टियां रद कर दी हैं। ऑपरेटर को रविवार को भी आकर डॉक्टरों की एमएलआर को ऑनलाइन करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में तैनात ऑपरेटर को 19 डॉक्टरों की एमएलआर को अपडेट करना है।
वर्जन
डॉक्टरों को 31 दिसंबर तक सभी एमएलआर और पीएमआर ऑनलाइन करनी हैं। ऐसे में डाक्टरों को परेशानियों तो काफी आ रही है, लेकिन डाक्टरों को यह तो करना पड़ेगा। हर नए काम में परेशानियां आती हैं। धीरे-धीरे सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। ऐसा न होने पर डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
डॉ. एसके गुप्ता, एमएस, सिविल अस्पताल पानीपत।