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एक तरफ मजूदरों के मुंह से निवाला छीना, तो दूसरी तरफ बांट दिए 45 करोड़ रुपये उधार

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पानीपत। 78 मजदूरों के मुंह से निवाला छीनने वाला शुगर मिल बिना किसी प्रावधान के 45 करोड़ रुपये उधार के तौर पर बांट चुका है, जो आज तक भी वसूल नहीं हो पाई है। इतनी बड़ी रकम की उधारी कैसे दी गई, क्या सामान बेचा गया, किसे एडवांस दिया गया, इस विषय पर मिल प्रबंधन ओर कर्मचारी नेता आमने सामने हो चुके हैं। इसमें सबसे बड़ी उधार डिस्टलरी पर ही खड़ी है, इस पैसे की आज तक रिकवरी भी नहीं हो पाई। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस बात के उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि मिल की 45 करोड़ रुपये से भी ज्यादा उधारी खड़ी है, जो वसूल तक नहीं हो पा रही है।
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वहीं प्रबंधक का कहना है कि करोड़ों की इस उधारी का यह मामला उनके संज्ञान तक में नहीं है, उन्हें सिर्फ 45 लाख रुपये की उधार का ही पता है, जिसकी रिकवरी के लिए प्रबंधन ने लोकायुक्त में केस डाला हुआ है।
इस मामले पर कर्मचारी नेताओं में खासा रोष बना हुआ है। उनका कहना है कि प्रबंधन की मिलीभगत के चलते पूरे भारत में कई पार्टियों को यह माल उधार में बेचा या एडवांस दिया गया है, जिसकी आज तक कोई रिकवरी तक नहीं हो पाई है। मिल के पास पूरे संसाधन हैं, इसके बाद भी इसे घाटे में चलाया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया है कि इस उधार में मिल कर्मचारियों पर भी बकाया राशि दिखाई गई है। उनका कहना है कि मिल प्रबंधन के पास कर्मचारियों के हक की कमाई के लिए पैसे नहीं है, जबकि मिल उधार में करोड़ों रुपये एवं एडवांस राशि तक बांटता आ रहा है।
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ये है मामला : कर्मचारी नेता महाबीर शर्मा ने दावा किया है कि शुगर मिल ने वर्ष 2016 तक 45 करोड़ रुपये से ज्यादा का उधार दूसरी फर्मों एवं पार्टियों को दे चुका है। यह उधार किस बात की है, ये मिल प्रबंधन बताने को तैयार नही है, जबकि आरटीआई के एक खुलासे में करोड़ों की इस उधारी के तो उनके पास पुख्ता सबूत हैं। इस पैसे की रिकवरी नहीं हो पाई है। उन्होंने अंदेशा जाहिर करते हुए बताया कि करीब तीन साल पहले की यह उधारी अब बढ़कर 50 करोड़ से ज्यादा भी हो सकती है। इस बारे में कोई भी मिल अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। इस उधार में सबसे ज्यादा उधार डिस्टलरी की तरफ निकलती है, जोकि करीब 34 करोड़ रुपये है। डिस्टलरी के पास कई प्लांट हैं, जिन्हें आज तक चलाया तक नहीं गया। इनसे होने वाली कमाई तो मिली नहीं, उल्टा इन प्लांटों पर हर साल रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये अलग से खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मिल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास 78 मजदूरों की हक के 44 लाख रुपये 24 साल बाद भी नहीं दिए हैं।
पूरे संसाधन फिर भी दिखा रहे घाटा : महाबीर शर्मा ने बताया कि इस बात के उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि मिल के पास अपने काफी और पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन प्रबंधन की मिलीभगत से मिल को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। बिना किसी नियम के मिल प्रबंधन द्वारा करोड़ों रुपये की उधारी दी गई है। आज तक उनसे कोई बड़ी रकम नहीं वसूली जा चुकी है, जोकि गलत है।
मेरे संज्ञान में सिर्फ इतना मामला है कि मिल प्रबंधन को 45 लाख रुपये की उधारी लेनी थी। इसे वसूल करने के लिए लोकायुक्त के पास केस डाला हुआ है। 45 करोड़ रुपये उधारी का मुझे नहीं पता, इसके बारे में मिल अधिकारियों से पूछताछ करके ही बताया जा सकता है।
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संदीप अग्रवाल, प्रबंधक, शुगर मिल।
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