पानीपत। पानीपत रिफाइनरी के आसपास पानीपत व करनाल में अवैध रूप से चल रहे कंक्रीट मिक्सर प्लांट पर बड़ी कार्रवाई की है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शिकायत के आधार पर सख्ती दिखाई तो हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच के आधार पर 14 मिक्सर प्लांट पर 1.14 करोड़ का जुर्माना लगाया है।
इसके साथ तीन प्लांट को सील कर दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसी को आधार मानकर एनजीटी को 132 पेज की एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी है। जिसमें लिखा है कि उक्त कंक्रीट मिक्सर प्लांट वायु और जल प्रदूषण फैला रहे थे। साथ ही भूमिगत जल का दुरुपयोग भी किया जा रहा था। एनजीटी के आदेशों के बाद बोर्ड की सख्त कार्रवाई से ऐसे प्लांट संचालकों की परेशानी बढ़ गई हैं।
ददलाना गांव के दीपक ने इस मामले में एनजीटी में याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), पानीपत रिफाइनरी के सिविल कार्य के लिए कई निर्माण कंपनी काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने किसानों की कृषि भूमि को किराये पर जमीन लेकर रोड़ी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट स्थापित किए हैं। ऐसे लगभग 50 प्लांट लगाए गए हैं। इनकी किसी भी विभाग और बोर्ड से स्वीकृति नहीं ली गई है।
इनसे आसपास के क्षेत्र में वायु प्रदूषण होता है और भूमिगत जल का अवैध तरीके से दोहन किया जा रहा है। एनजीटी ने इस मामले को गंभीरता से लिया। आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया।
इसमें प्रशासन की तरफ से तहसीलदार पानीपत वीरेंद्र , हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एई कुलदीप सिंह और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वैज्ञानिक वीरेंद्र की टीम बनाई। यहां 23 प्लांट की पहचान की।
टीम ने मौके पर निरीक्षण किया तो कुछ प्लांट करनाल जिले के क्षेत्र में भी मिले। टीम ने करनाल स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को भी इसमें शामिल किया।