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Panchkula News: आधी रात को इमरजेंसी में आधे घंटे डेढ़ साल के बच्चे को नेबुलाइजर लगाने के लिए भटकती महिला

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अस्पताल के जनरल वार्ड, महिला वार्ड सहित अन्य जगहों पर अटेंडेंट और सुरक्षा में तैनात रहने वाले गार्ड नहीं आते नजर
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में बुधवार की रात एक बजे एक महिला पूनम अपने बच्चे को लेकर पहुंची। खांसी अधिक आने और छाती जाम होने के कारण बच्चे को नेबुलाइजर कराना था। ग्रीन एरिया में इलाज बंद होने के कारण वह आधे घंटे तक भटकती रही। वहां पर मरीज होने के बाद कोई स्टाफ मौजूद नहीं था।
आधे घंटे बैठने के बाद उसे किसी ने रेड एरिया में भेजा तब जाकर डेढ़ साल के बच्चे को नेबुलाइज किया गया। पूनम और वीरवती ने बताया कि वह माजरी गांव से इलाज कराने आए थे। इसी तरह जनरल वार्ड में रात 12 बजे के बाद खाना देने आए बरवाला निवासी पुनीत को मरीज टिंकू से रात में मिलने नहीं दिया गया। इस कारण उसे खाना नहीं मिल सका। टिंकू के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह बाहर नहीं जा सकता थ। वार्ड पूरी तरह से बंद होने के कारण मरीज के तीमारदारों को परेशानी हुई। यह हाल सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के थे।
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जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इलाज के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन रात के समय मरीज भटकते नजर आते हैं। रात में अव्यवस्था का आलम तो नजर आता ही है, वार्ड का स्टाफ भी गहरी नींद में चला जाता है। गार्ड तो ढूंढने से भी नहीं मिलता और हर वार्ड में तैनात अटेंडेंट भी नजर नहीं आते। अमर उजाला की रात 11 से 2 बजे तक की पड़ताल में सिविल अस्पताल सेक्टर-6 का यह हाल नजर आया।इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को डॉक्टर इलाज करते नजर आए। अस्पताल की सुरक्षा में कोई गार्ड तैनात नजर नहीं आया। अधिकांश वार्डों को लॉक किया हुआ था।
कहीं अटेंडेंट नहीं मिले तो कहीं कर्मचारी सोते नजर आए
अमर उजाला की टीम रात 12:10 बजे महिला वार्ड में गई। इस दौरान यहां पर तैनात अटेंडेंट की सीटें खाली पड़ी थीं। इसके अलावा कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं था। महिलाओं के वार्ड में अटेंडेंट नहीं होने के कारण तीमारदार परेशान दिखे। इसके सामने बने वार्ड में भी सफाई नहीं थी। पीने के पानी की सुविधा ठीक नहीं थी। बदबू का आलम था।
वाॅश बेसिन पूरी तरह से बंद था। इस कारण यहां आने वाले लोग परेशान नजर आ रहे थे। इसके अलावा पीडियाट्रिक वार्ड का भी यही हाल था। वहां भी कोई गार्ड तैनात नहीं था। प्राइवेट वार्ड में भी कोई गार्ड नजर नहीं आया। प्राइवेट वार्ड, नशामुक्ति केंद्र में भी कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं था। इनको अंदर से लॉक किया गया था। इसके अलावा डेंगू वार्ड में भी अटेंडेंट गायब थे। गार्ड केवल इमरजेंसी, नवजात शिशु देखभाल वार्ड और लेबर रूम में नजर आए। छाती वार्ड में कर्मचारी रूम बंद कर सो रहे थे। एसडी मेडिसिन वार्ड में सभी स्टाफ मौजूद रहा लेकिन गार्ड नदारद रहा। इस तरह के हालात में सिविल अस्पताल में सफाई कर्मचारी वार्ड को पूरी तरह से बंद कर देती हैं।

डॉक्टर मिले तैनात
इमरजेंसी वार्ड में चार डॉक्टरों की टीम तैनात मिली। दो बजे के बाद भी डॉक्टर अपनी सीटों पर नजर आए। इस दौरान चोट के दो मामले आने के बाद डॉक्टरों की तरफ से उनका इलाज किया गया।
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अस्पताल में गार्ड की कमी के कारण सभी जगह तैनाती नहीं हो पा रही है। अस्पताल में अगर किसी वार्ड में अटेंडेंट गायब है, तो इसकी राउंड कर जानकारी लूंगा। इमरजेंसी इंचार्ज को निर्देश हैं कि सभी जोन में इलाज की व्यवस्था जारी रखी जाए। जल्द ही इसकी चेकिंग करूंगा अगर इसमें खामी मिलेगी तो कारण बताओ नोटिस देने के साथ कार्रवाई करेंगे। - डॉ. जितेंदर सिंह, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर -6
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