पंचकूला। सेक्टर-7 के दुर्गा मंदिर में पावन श्रावण मास के अवसर पर शिव महापुराण की कथा के दूसरे दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर यमुना पुरी जी महाराज ने कहा कि जितने भी भंवरे होते हैं, सब के सब नपुंसक होते हैं। भंवरे में नर और मादा का भेद नहीं होता। भंवरे के अपने बच्चे नहीं होते हैं। वह चौमासा के समय किसी भी कीड़े को पकड़कर मिट्टी के घर में बंद कर देता है। जिस कीड़े को भंवरा ने घर में बंद किया है, वह हर समय भंवरे का चिंतन करता है कि भंवरा आएगा और मुझे खाएगा। वह भंवरे का चिंतन करते-करते एक दिन स्वयं भंवरा बन जाता है। यहीं बात भक्ति पर भी लागू होती है, जिसका चिंतन, जिसका ध्यान करोगे, उसके जैसे ही बन जाओगे। यमुनापुरी जी महाराज ने कहा कि एक बार सीता जी अशोक वाटिका में पेड़ के नीचे बैठी थी, उनके देखते-देखते हल्की-हल्की बारिश पड़ रही थी। उनके देखते-देखते एक कीड़ा पेड़ के ऊपर से नीचे गिरा और नीचे आकर भंवरा बनकर उड़ गया। जिसे देखकर सीता जी हैरान हो गई कि लंका में रावण, मेघनाथ, कुंभकरण रूप बदल लेते हैं, लेकिन यहां तो कीड़े भी रूप बदल लेते हैं।
सेक्टर-7 दुर्गा मंदिर के प्रधान अशोक जिंदल ने बताया कि कष्टनिवारणी शिव महापुराण कथा की पूजा प्रतिदिन पंचकूला सेक्टर-7 दुर्गा मंदिर में प्रातः 8 से 9.30 बजे होगी। 27 जुलाई दिन रविवार को प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक हवन प्रातः 10 बजे से 12.30 बजे तक कथा उसके उपरांत दोपहर 12.30 बजे भक्तजन के लिए विशाल भंडारा लगाया जाएगा।