माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर के सेक्टर -6 सिविल अस्पताल के डी ब्लॉक की बिल्डिंग में बिना फायर एनओसी के बिल्डिंग में इलाज किया जा रहा है। इस तरह के हालात में अगर पंचकूला सिविल अस्पतल में झांसी के मेडिकल कॉलेज की तरह हादसा हुआ तो इस मामले में जिम्मेदार कौन होगा। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर एनओसी के लिए अप्लाई नहीं किया गया है। इस कारण अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों में भय बना हुआ है।
सेक्टर -6 सिविल अस्पताल में रोजाना इलाज के लिए चार हजार मरीज आते हैं। इसके बाद डी ब्लॉक में बने वार्डों और सेंटर में अधिक लोग आते हैं। इसमें इमरजेंसी, लेबर रूम, एसएनसीयू (विशेष नवजात देखभाल इकाई), बच्चों के वार्ड, सर्जरी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और रेडियोलॉजी विभाग इसमें आते हैं। इन सभी विभागों को धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इलाज कराने आए लोगों और दबी जुबान से डॉक्टरों में भी फायर एनओसी नहीं होने का डर सता रहा है।
इसके बाद भी इस पर कोई काम नहीं किया गया है। अस्पताल को 500 बेड का बनाया गया। है। इसमें अधिकतर करीब 200 बेड इस वार्ड के अंदर आते हैं। इस तरह के हालात में अगर बच्चों सहित किसी वार्ड में आग लगती है तो लोगों की जान खतरे से खाली नहीं हैं। पिंजौर से इलाज कराने आए अविजीत सिंह ने बताया कि फायर एनओसी नहीं होने के बाद बेटे का इलाज कराने आए हैं। इस तरह में डर का माहौल बना रहता है। यही हालात सर्जरी वार्ड में ऑपरेशन के लिए आए मरीज के तीमारदार सूरज कुमार ने बताया कि बिना फायर एनओसी बिल्डिंग को ठीक कराया जाए।
अस्पताल के डी ब्लॉक का जल्द ही शिफ्ट करने का प्लान बनाया गया है। अगर एनओसी नहीं हैं तो जल्द ही इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से अप्लाई किया जाएगा। डॉ. जितेंदर सिंह, पीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर -6
अस्पताल के डी ब्लॉक की एनओसी नहीं दी गई है बाकि अन्य ब्लॉक की एनओसी दी गई है। अगर इसके लिए विभाग की ओर से इसके लिए अप्लाई नहीं किया जाएगा तो कारण बताओं नोटिस भेजेंगे। तरसेम सिंह, फायर ऑफिसर, पंचकूला सेक्टर -5