चंडीगढ़। मिर्चपुर कांड के पीड़ितों ने हरियाणा सरकार पर सही प्रकार से पुनर्वास न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह भिखारियों से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। ऐसे में उन्हें इंसाफ मिले, इसलिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। पीड़ितों ने अर्जी दाखिल कर बताया है कि हरियाणा सरकार ने सही प्रकार से पुनर्वास नहीं किया है।
हाईकोर्ट ने पीड़ितों द्वारा दाखिल अर्जी पर अब हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
मिर्चपुर कांड को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था और सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भेज दिया था। याचिका में आरोप लगाया था कि हरियाणा सरकार मिर्चपुर के पीड़ितों के पुनर्वास की दिशा में काम नहीं कर रही है। कई साल बाद भी लोग घरों से दूर टेंट लगाकर जीने को मजबूर हैं।
जहां एक ओर पेट भरने का संकट है तो दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार से जवाब मांगा था। हरियाणा सरकार ने कहा था कि मिर्चपुर कांड के पीड़ितों को गांव में किसी भी तरह का खतरा नहीं है। गांव में 40- 45 परिवार पीड़ित थे, जिनमें से कांड के बाद 33 परिवार गांव छोड़ गए।
अब परिवार वापस आ गए हैं और किसी को कोई शिकायत नहीं है। अब इस मामले में अर्जी दाखिल करते हुए पीड़ितों ने बताया कि सरकार उनका पुनर्वास सही प्रकार से नहीं कर रही है। सैकड़ों लोग अब भी टेंट में अस्थायी तौर पर रह रहे है। ज्यादातर लोगों को पक्के मकान नहीं मिले हैं और जिन्हें मिले हैं, उनमें बिजली-पानी की व्यवस्था नहीं है। साथ ही सरकार ने जिन लोगों को मकान दिए हैं, उनकी गांव की जमीन सरकार ने ले ली है। याची ने कहा कि उनके हालत भिखारियों से भी बदतर हैं।
यह था मामला
10 अप्रैल 2010 को मिर्चपुर में एक कुत्ते को डंडा मारने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। घटना के बाद 250 से ज्यादा दलित परिवार गांव से पलायन कर गए थे। प्रदेश सरकार ने मिर्चपुर के 258 पीड़ित परिवारों का ढूंढकर गांव में पुनर्वास करने के लिए योजना बनाई है। सरकार के अनुसार करीब 12 एकड़ में उन्हें बसाया जाएगा। पुनर्वास के तहत बसाए गांव का नाम दीनदयाल पुरम रखने की योजना है।