फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया वेंडरों का केस, अब वेंडिंग जोन में ही जाना होगा, 5 तक हो जाएं शिफ्ट

Thu, 28 Nov 2019 01:23 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
वेंडरों को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वेंडरों का केस खारिज हो गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने वेंडरों को अपनी समस्या हाईकोर्ट में रखने की सलाह दी है। केस खारिज होने के बाद अब वेंडरों को 5 दिसंबर तक वेंडिंग जोन में शिफ्ट होना होगा। उसके बाद नगर निगम कानूनी कार्रवाई करेगा।
विज्ञापन


19 नवंबर को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश जारी किए थे कि पांच दिसंबर तक हर हाल में सेक्टर एक से लेकर छह तक और सेक्टर-17 को वेंडिंग जोन मुक्त बनाया जाए। उसके बाद नगर निगम ने वेंडरों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिए। साथ वेंडरों को साइट अलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिए, लेकिन कुछ वेंडरों ने नोटिस लेने से इंकार कर दिया।

उनका कहना था कि हम हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इस बीच नगर निगम ने वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के लिए पब्लिक नोटिस जारी कर दिया। निगम से स्पष्ट लिखा कि पांच दिसंबर तक जो वेंडर शिफ्ट नहीं होंगे हाईकोर्ट के निर्देशानुसार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


चंडीगढ़ रेहड़ी फड़ी यूनियन के अध्यक्ष राम मिलन गौड़ के नेतृत्व में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि मामला फिलहाल पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पास है इसलिए मामले में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। जिन वेंडरों को समस्या है, उन्हें हाईकोर्ट में ही जाना चाहिए। वहां जाकर अपनी समस्या बतानी चाहिए।
विज्ञापन

सेक्टर 15 में बैठेंगे सबसे ज्यादा वेंडर

नगर निगम ने सबसे ज्यादा वेंडरों को बैठाने की व्यवस्था सेक्टर 15 में की है। वहां लगभग 900 से एक हजार वेंडर बैठेंगे। हालांकि पहले यहां 1100 वेंडरों के बैठने की व्यवस्था थी, लेकिन पार्किंग की समस्या आने के कारण कुछ वेंडरों का साइट कैंसिल कर दीं। इसी तरह सेक्टर 19 में 30 और सेक्टर 22 में लगभग 70 वेंडरों के बैठने की व्यवस्था की है। शहर की यही प्रमुख मार्केट हैं, जिनमें सबसे ज्यादा समस्या है। इसलिए इन पर निगम का विशेष ध्यान है।

ड्रॉ सिस्टम से हाल ही में 432 वेंडरों को दी थी साइट
हाल ही में 16 और 17 नवंबर को नगर निगम ने 492 वेंडरों को दो फेज में ड्रॉ सिस्टम से साइट अलॉट की थीं। इसमें सबसे ज्यादा साइट धनास में अलॉट की गईं थीं। इसमें ज्यादातर वेंडर ऐसे थे जिन्होंने काफी दिनों से फीस नहीं भरी थी। वेंडरों ने अतिरिक्त रुपयों के साथ फीस जमा करा दी थी। उसके बाद निगम ने उनका खाता भी अनलॉक करा दिया था।

साइट अलॉट करने वालों में भी कई हुए डिफॉल्टर
साइट अलॉट होने के बाद कई ऐसे वेंडर हैं जिन्होंने स्वयं ही लाइसेंस कैंसिल करने को कह दिया है। वहीं कुछ ऐसे वेंडर भी हैं जिन्होंने अब तक अपनी फीस जमा नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार ऐसे लगभग साढ़े तीन सौ वेंडर हैं जो डिफाल्टर की लिस्ट में हैं। यदि जल्द इन्होंने फीस जमा नहीं की तो उनका लाइसेंस कैंसिल करने के साथ ही साइट भी कैंसिल कर दी जाएगी।

अब 19 करोड़ रुपये निगम के पास आए अभी तक
वेडरों की फीस से अब तक नगर निगम केपास 19 करोड़ रुपये आ चुके हैं। वहीं कई वेंडरों की फीस अभी भी जमा होना शेष है। ऐसे में निगम को अच्छी खासी इनकम भी होना तय है। अब तक सख्ती न होने से वेंडर ऐसे ही अपना काम चला रहे थे।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के खिलाफ सुखना लेक के वेंडरों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है।
- पुनीत बाली, सीनियर एडवाकेट और चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल के वकील

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, लेकिन हाईकोर्ट को को हमारी समस्याएं सुनने को कहा है। पर्यटक स्थलों पर वेंडर होने ही चाहिए।
- राम मिलन गौड़, अध्यक्ष, चंडीगढ़ रेहड़ी फड़ी यूनियन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें