जिस यूटी पुलिस की कार्यशैली की सराहना खुद गवर्नर खुले दिल से करते हों, उसकी हकीकत वैसी नहीं है। स्नैचिंग के एक मामले को अपनी स्मार्टनेस से मिसिंग में ऐसे बदल दिया कि पीड़िता ही हैरान रह गई। जब इसकी शिकायत आलाअधिकारियों से की गई तो गलती सुधारकर स्नैचिंग में केस दर्ज किया गया। बहरहाल, इस कारनामे ने यूटी पुलिस पर सवाल तो खड़ा कर ही दिया है।
घटनाक्रम कुछ यूं है। 20 नवंबर की शाम करीब 7.30 बजे बीए की छात्रा सुनंदा धीमान सेक्टर-15 स्थित मार्केट से वापस पीजी लौट रही थी। बकौल सुनंदा, मार्केट में सफेद रंग की एक्टिवा पर सवार एक युवक ने उसका पर्स झपट लिया। पर्स में 1200 रुपये, जरूरी कागजात और एसबीआई का एटीएम कार्ड था। उसने शोर मचाया तो लोगों ने स्नैचर को पकड़ने की कोशिश भी की लेकिन वह चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद सुनंदा सेक्टर-15 स्थित पुलिस बीट बॉक्स पहुंची और स्नैचिंग की शिकायत दी।
बीट बॉक्स में मौजूद महिला पुलिसकर्मी ने शिकायत की कॉपी अगले दिन ले जाने को कहा। अगले दिन जब सुनंदा ने डीडीआर की कॉपी देखी तो उसमें पर्स स्नैचिंग के बजाय मिसिंग लिखा था। उसने इस पर आपत्ति भी जताई लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई। परेशान होकर सुनंदा ने इसकी शिकायत डीजीपी की ऑफिशियल मेल पर कर दी। इसके कुछ ही समय बाद उसे सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन में बुलाया गया और स्नैचिंग की धाराओं में केस दर्ज किया गया।