रायपुररानी। केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए शुरू की गई ऑनलाइन फसल पंजीकरण योजना में जिला पंचकूला के हजारों किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। फसल पंजीकरण योजना से मिली जानकारी के अनुसार पंचकूला के 20130 किसानों द्वारा अब तक खेती की लगभग एक लाख सोलह हजार एकड़ भूमि का रजिस्ट्रेशन करवाया है। विभाग के अनुसार सभी किसानों का ऑनलाइन डाटा दर्ज होने के बाद किसी भी ब्योरे को चेक करने में किसान और विभाग को बहुत सुविधा हो गई है। क्षेत्र के किसान करन राणा शाहपुर, ज्ञान चंद भागपुर, रामकरण गुज्जर, कृष्ण सैनी, नैब नंबरदार वजीदपुर, जगीर सिंह रत्ताटिब्बी, कृष्ण फौजी गोबिंदपुर, पवन बधौर, करमजीत खेड़ी, बिट्टू वालिया ने बताया कि ग्रामीण एरिया में अधिकतर भूमि का बंटवारा न होने के कारण कई किसानों की भूमि का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन संभव नहीं है।
किसानों ने सरकार से मांग कर बताया है कि अपने हिस्सेदारी की भूमि के बंटवारे को लेकर राजस्व विभाग के माध्यम से सरल प्रक्रिया के अनुसार जल्द से जल्द भूमि को मलकियत हिस्से में तकसीम करवाना चाहिए। किसानों ने बताया कि ऑनलाइन खेती योग्य भूमि की फसल बीमा को लेकर बहुत संशय बना रहता है। उन्होंने बताया कि जिस किसान ने बैंक से एग्री गोल्ड कार्ड अर्थात लोन लिया हुआ है उनकी भूमि में लगी फसल का बिना निरीक्षण किए ही बीमा राशि काट ली जाती है। फसल खराब होने पर कोई बीमा राशि का क्लेम भी मिलता है।
रजिस्ट्रेशन व फसल बीमा के नाम पर किसानों को गुमराह किया जाता है। सरकार और बीमा कंपनी के माध्यम से कोई मुआवजा भी नहीं दिया जाता। लोगों को कार्यालय में चक्कर लगवाकर कागजी कार्रवाई तो पूरी करवा ली जाती है लेकिन मुआवजा किस्त नही मिलती। - बहादुर सिंह, किसान नेता
किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि जारी किए जाने की सूचना महज विज्ञापन में ही सुनने को मिलती है जबकि किसी भी आपदा के कारण खराब हुई फसल का मुआवजा तो दूर जानकारी भी नही मिलती है। - करमजीत सरोय, गांव खेड़ी
सरकार की ऑनलाइन प्रणाली से लोगों में समस्या के समाधान होने की उम्मीद जगी थी लेकिन कार्यालय के चक्कर काटने के अलावा कुछ नहीं मिला। किसी समस्या का कोई स्थायी समाधान भी नहीं मिलता है। - सर्वजीत सिंह परमार, स्थानीय किसान
ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में ऐसे लोगों ने अपनी भूमि का रजिस्ट्रेशन करवाया था जिनकी एक इंच जमीन भी राजस्व विभाग में नहीं है। खेतीबाड़ी का कार्य करने वाले किसान को कार्यालय में जाने के बाद ही पता लगता है कि ऑनलाइन आवेदन में मालिक कोई और ही बना रखा है। - अर्जुन राणा, ब्लॉक के गांव नटवाल निवासी