पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार बने त्रिकोणीय गठबंधन में एक नई समस्या खड़ी हो गई है। गठबंधन के अहम सहयोगी पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) के 6 उम्मीदवारों ने भाजपा के कमल निशान से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। छह प्रत्याशियों ने पीएलसी के हाकी बॉल चिह्न से लड़ने से इनकार कर दिया है। पीएलसी प्रत्याशियों की इस मांग के बाद पार्टी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है। बताया यह जा रहा है कि जल्द ही इसके अच्छे परिणाम सामने आ जाएंगे।
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद पंजाब में पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री और पीएलसी प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। जिसमें सुखदेव सिंह ढींडसा की पार्टी शिरोमणि अकाली दल संयुक्त भी शामिल है। पंजाब में बने इस नए गठजोड़ में भाजपा 65, कैप्टन की पंजाब लोक कांग्रेस 37 और शिअद संयुक्त 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गठबंधन के तहत पीएलसी को कुछ ऐसी सीटें मिली हैं, जो शहरी हैं। यहां भाजपा का अपना जनाधार है। साथ ही भाजपा का कमल निशान भी पीएलसी के मुकाबले ज्यादा पहचान वाला है। इस कारण पीएलसी के 6 ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने इन शहरी सीटों से पीएलसी के हाकी बॉल के स्थान पर कमल निशान से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। जिसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभा रही भाजपा कैप्टन के इस प्रस्ताव को मान लेगी, जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी जाएगी।
ये हैं छह सीटें
पीएलसी को गठबंधन के तहत बठिंडा शहरी, लुधियाना पूर्व, लुधियाना उत्तरी और आत्मनगर सीट सहित दो और शहरी सीटें मिली हैं। ये सभी सीटें शहरी क्षेत्र तहत आती हैं। इन सीटों पर पीएलसी के प्रत्याशियों ने कमल चुनाव चिह्न की मांग की है। प्रत्याशियों का कहना है कि शहरी सीटों के कारण कमल निशान उनकी जीत की राह को और आसान कर देगी।
भाजपा के हो चुके हैं कैप्टन के करीबी
भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल कैप्टन के कुछ करीबी कांग्रेस नेता पहले ही भाजपा के हो चुके हैं। इनमें कांग्रेस छोड़ने वाले विधायक राणा सोढ़ी, फतेहजंग बाजवा और हरजोत कमल बड़े नाम शामिल हैं। हालांकि पार्टी के नेताओं का कहना है कि चुनाव में जीत महत्वपूर्ण है। कौन किस निशान से चुनाव लड़ रहा है यह कोई मायने नहीं रखता है।
गांव में कैप्टन का वर्चस्व
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का पंजाब के गांवों में वर्चस्व है। 2017 में भी कैप्टन ने कांग्रेस को सत्ता की कुर्सी ग्रामीण इलाकों से 44 सीटें जीत कर दिलाईं थीं। इसमें मालवा के अधिकांश ग्रामीण इलाके शामिल थे। इस बार भी भाजपा शहरी क्षेत्रों में तो कैप्टन और ढींडसा ग्रामीण क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।