फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेटवर्क है नहीं, किताबें मिली नहीं, आखिर कैसे करें ऑनलाइन पढ़ाई, कक्षा-1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को इस सत्र की नहीं मिलीं हैं किताबें

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। जिले के निजी स्कूलों को टक्कर देने का दावा करने वाले पंचकूला के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को इस शैक्षणिक सत्र की किताबें अब तक नहीं मिली हैं। साथ ही जिले में कई जगह ऐसे हैं, जहां पहली से चौथी तक के स्कूूली बच्चे नेटवर्क की समस्या के चलते ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं लगा पा रहे हैं। शैक्षणिक सत्र पहली अप्रैल से शुरू हो चुका है। पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन किताबों के अभाव के चलते बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन

नग्गल, मोगीनंद, मोरनी और बिटना में नेटवर्क की समस्या
मोरनी के करीब 40 स्कूलों के बच्चे को नेटवर्क की समस्या के चलते ऑनलाइन कक्षाएं लगाने में परेशानी होती है। कुछ शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक तो किताबें नहीं आई और दूसरी सबसे बड़ी समस्या यहां नेटवर्क की है। जूनियर कक्षाओं के बच्चे व्हाट्स अप के माध्यम से स्कूल को शिक्षा देने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन यह कारगर नहीं है। जब तक बच्चों के पास किताबें नहीं होंगी। यही हाल पंचकूला के मोगीनंद और पिंजौर के बिटना एरिया का भी है। यहां भी नेटवर्क की समस्या है। कई गांवों में बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। पड़ोसियों से उनके अभिभावक मोबाइल फोन मांगकर लाते हैं तो नेटवर्क की समस्या शुरू हो जाती है।
छह माह पहले नहीं किया टेंडर
स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क किताबें मुहैया कराने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है। इस बार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। दिसंबर तो दूर मार्च-अप्रैल तक टेंडर नहीं हुआ और मई में विभाग ने बच्चों को किताबें मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए। बच्चों को 200-300 रुपये किताबें खरीदने के लिए देने की घोषणा तो की गई, लेकिन उनके खातों में राशि आज तक नहीं पहुंची।
विज्ञापन

क्या कहते हैं स्कूली बच्चे और उनके अभिभावक
नग्गल निवासी ज्वाला सिंह ने बताया कि उनका बेटा पंचकूला सेक्टर-25 गवर्नमेंट स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन अभी अल्टरनेट डे कर कक्षाएं लगाई जा रही हैं, लेकिन उसके पास किताबें नहीं हैं। गांव से ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए जुड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन नेटवर्क की समस्या के चलते ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाता, बिटना निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि हमारे पास स्मार्ट मोबाइल फोन नहीं है, बेटा दूसरी कक्षा में पढ़ता है, ऑनलाइन क्लास के लिए पड़ोसियों से मोबाइल मांगकर लाता हूं, लेकिन नेटवर्क समस्या के चलते बेटा पढ़ नहीं पाता, उसके पास किताबें भी नहीं हैं। कक्षा के एक रितिका के पिता ने बताया कि मोगीनंद में रहते हैं यहां तो नेटवर्क की बड़ी समस्या है, यहां मोबाइल फोन से ठीक से बात नहीं हो पाती, बच्चे ऑनलाइन क्लासेज कैसे लगाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें