पंचकूला। पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित शालीमार ग्राउंड में दशहरे की शाम कुछ ऐसी थी, मानो जमीन पर जनसैलाब और आसमान में जुगनुओं का मेला उतर आया हो। देश के सबसे ऊंचे 221 फीट के रावण को देखने के लिए 50 हजार से अधिक लोग पहुंचे। हजारों मोबाइल की टिमटिमाती रोशनी ने मैदान को जगमगा दिया। हर चेहरा उत्साह से दमक रहा था, हर ओर जय श्रीराम के जयकारे गूंज रहे थे। जैसे ही रावण के पुतले ने आग पकड़ी, आतिशबाजी से आसमान चमक उठा। उस पल में लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव जिया। आयोजन पर 70 लाख रुपये खर्च हुए।
इस बार रावण के चेहरे पर दिखा शांत भाव
इस बार दशानन के चेहरे से गुस्से के भाव हटाकर उसे शांत रूप दिया गया था। पिछले 25 वर्षों से रावण को लाल आंखों और खूंखार चेहरे के साथ दिखाया जाता रहा था। इस बार डिजाइनर ने दो महीने तक रिसर्च कर चेहरे, मूंछों के कट और स्टाइल में बदलाव किया।
आंकड़ों में रावण
- 58 फीट ऊंचा मुकुट
- 25 फीट लंबा चेहरा
- 700 लोगों की टीम ने लगातार काम किया
- पुतले को तैयार करने में साढ़े तीन महीने लगे
6.5 टन लोहा — पुतले के निर्माण में इस्तेमाल।
700 बांस — ढांचा तैयार करने में उपयोग।
5000 मीटर कपड़ा — पुतले को सजाने में इस्तेमाल।
देश के दूसरे शहरों में रावण की ऊंचाई
- दिल्ली में 211 फीट
- देहरादून में 181 फीट
18 रिमोट ब्लास्ट, तीन हिस्सों में उड़े 10 सिर
- पुतले में 18 रिमोट कंट्रोल्ड ब्लास्ट लगाए गए थे।
- 10 सिरों को तीन हिस्सों में बांटा गया था, जिन्हें रिमोट से ब्लास्ट कर उड़ाया गया।
- दोनों बाजुओं में चार, चेहरों में दो और सिर के छत्र में एक ब्लास्ट की व्यवस्था थी।
- पूरे स्ट्रक्चर में 2000 से ज्यादा विशेष रस्सों का इस्तेमाल किया गया था।