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Panchkula News: स्वच्छ सर्वेक्षण की दौड़ शुरू, सफाई-शाैचालयों की जांच के लिए केंद्र की टीम पहुंची चंडीगढ़

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चंडीगढ़। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में फील्ड सर्वे की दौड़ शुरू हो चुकी है। शहर की सफाई व्यवस्था की जांच के लिए केंद्र सरकार की टीम चंडीगढ़ पहुंच गई है।
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इस सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग पाने के लिए नगर निगम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन उसकी प्राथमिकता सिर्फ सार्वजनिक शाैचालयों को चमकाने तक ही सीमित नजर आ रही है। प्रमुख मार्केटों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर फैले कूड़े-कचरे की ओर निगम का ध्यान कम ही दिखाई दे रहा है।
केंद्र की टीम सोमवार को नगर निगम की तरफ से सीवरेज की सफाई में इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों की गुणवत्ता की भी जांच करेगी। इसके लिए निगम की तरफ से सामानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके बाद टीम कई शौचालयों व कुछ इलाकों का दौरा भी करेगी। इस वजह से ही निगम ने शहर के कई सार्वजनिक शौचालयों को चमकाने और उनमें साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया है।
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दूसरी तरफ सेक्टर-17, 22, मनीमाजरा और अन्य व्यस्त बाजारों में कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं। सेक्टर-26 की मंडी के हाल भी बदहाल हैं। व्यापारियों और निवासियों ने नगर निगम पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वेक्षण टीम को प्रभावित करने के लिए केवल दिखावटी सफाई की जा रही है, जबकि असल समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में 2022 के मुकाबले चंडीगढ़ को सिर्फ एक पायदान की उछाल मिली थी, लेकिन अगर डड्डूमाजरा का डंपिंग ग्राउंड नहीं होता तो चंडीगढ़ 2023 में ही चौथे नंबर पर होता। चंडीगढ़ 11वें स्थान पर आया था, जबकि 2021 में 66वें नंबर पर था।


आयुक्त ने की सक्रिय भागीदारी की अपील
निगम आयुक्त अमित कुमार ने शहरवासियों से स्वच्छता सर्वेक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। आग्रह किया कि वे सर्वेक्षण में भाग लें और आसपास की सफाई को लेकर अपनी राय साझा करें। नागरिक http://sbmurban.org/feedback लिंक पर जाकर ऑनलाइन फीडबैक जमा कर सकते हैं। इस वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण में स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग, खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति और वाटर प्लस श्रेणी जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया गया है। नागरिकों की भागीदारी और फीडबैक, शहर की रैंकिंग में अहम भूमिका निभाएगा।
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गलत दावा किया तो कटेंगे नंबर
स्वच्छ सर्वेक्षण का तरीका इस वर्ष बदल गया है। केंद्र ने अपनी गाइडलाइंस में कहा है कि अगर किसी शहर की तरफ से पोर्टल पर अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स में किए गए दावों और जमीनी हकीकत में फर्क मिलेगा तो शहर की निगेटिव मार्किंग होगी। यानी अंक में कटौती हो सकती है। पहले सर्वेक्षण के लिए 9500 अंक निर्धारित किए गए थे। इस बार बढ़ाकर 12500 कर दिया गया है। गाइडलाइन के मुताबिक यदि डाॅक्यूमेंट और फील्ड सर्वे में 20 फीसदी से अधिक का फर्क पाया जाता है तो विभिन्न स्तर पर अंक कटेगा।
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