चंडीगढ़। लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को करनाल में हुई किसानों की महापंचायत और लघु सचिवालय घेराव का सरकार ने पल-पल का फीडबैक लिया। डीजीपी पीके अग्रवाल और एडीजीपी कानून एवं व्यवस्था नवदीप सिंह विर्क हर घटनाक्रम की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गृहमंत्री अनिल विज को देते रहे। सुबह से लेकर रात तक चले घटनाक्रम पर सरकार की निगाह टिकी रही।
सरकार का पूरा फोकस किसानों की महापंचायत को शांतिपूर्ण तरीके से कराने को लेकर रहा। प्रदेश सरकार किसी भी सूरत में 10 दिन पहले बसताड़ा टोल की घटना की पुनरावृत्ति नहीं चाहती थी। सरकार का खुफिया विभाग भी अलर्ट रहा और तमाम घटनाक्रम की जानकारी आला अधिकारियों को देता रहा। हालांकि, सरकार द्वारा की गई तमाम तैयारियों के बावजूद किसानों ने शाम को लघु सचिवालय का घेराव कर लिया और वहीं पर डेरा जमा लिया।
बता दें कि 28 अगस्त को करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में भाजपा की बैठक थी। बसताड़ा टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसान जब विरोध करने के लिए चले तो इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया, जिससे कई किसान घायल हो गए। वहीं, ड्यूटी मजिस्ट्रेट आयुष सिन्हा की किसानों के सिर फोड़ने की वीडियो वायरल होने से मामले ने और तूल पकड़ लिया। इसी मामले से गुस्साए किसानों ने किसान महापंचायत और लघु सचिवालय घेराव की घोषणा की थी।